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एपीआई के 400 अंक ने कार्यवाहक प्रिंसिपलों की नींद उड़ाई   

Tue, 23 May 2017 02:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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 एपीआई (एकेडमिक परफोरमेंस इंडीकेटर) को लेकर कई एडेड कॉलेजों के कार्यवाहक प्रिंसिपल की दिल की धड़कन बढ़ी हुई है। सीसीएसयू ने हाल में कॉलेजों के मैनेजमेंट को कार्यवाहक प्रिंसिपलों की नियुक्ति के संबंध में एक पत्र जारी किया है। उसके मुताबिक प्रिंसिपल के लिए एपीआई का 400 अंक होना आवश्यक है। पत्र जारी होने के बाद कॉलेजों में हलचल शुरू हो गई है। कई कार्यवाहक प्रिंसिपल को इस नियम पर खरे उतरना है। टीचिंग, रिसर्च और पब्लिकेशन से दूरी बनाने वाले शिक्षकों के लिए एपीआई पूरी कर पाना मुश्किल होगा। 
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करीब छह महीने पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश के 50 से अधिक एडेड कॉलेजों में प्रिंसिपल की कुर्सी चली गई थी। कॉलेजों के मैनेजमेंट ने कार्यवाहक प्रिंसिपल की नियुक्ति की। मेरठ शहर की बात करें तो पांच डिग्री कॉलेजों के प्रिंसिपल बदल गए थे। विवि ने कॉलेजों के मैनेजमेंट अध्यक्ष और सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि तीन महीने के लिए या रेग्युलर नियुक्ति तक जो भी पहले कार्यवाहक प्रिंसिपल नियुक्त किए थे। इसके अलावा तीन महीने के बाद भी रेग्युलर प्रिंसिपल नहीं आने पर जिस सीनियर मोस्ट शिक्षक  को कार्यवाहक प्रिंसिपल बनाया जाए, वह निम्न योग्यता पूरी करता हो। पोस्ट ग्रेजुएशन में 55 प्रतिशत अंक हो। पीएचडी की हो। एसोसिएट प्रोफेसर (रीडर)/प्रोफेसर के साथ 15 साल का टीचिंग या रिसर्च या प्रशासनिक अनुभव हो। एपीआई में 400 स्कोर हो। बहुत से शिक्षकों के लिए एपीआई टेंशन का विषय हो गई है। 400 स्कोर में 120 अंक ड्यूटी के हैं, जो कॉलेज में विभिन्न दायत्वि निभाने के लिए मिलेंगे। 280 अंक में खुद की पीएचडी। कितने छात्रों को पीएचडी कराई। सेमिनार, पब्लिेशन और प्रोजेक्ट आदि के नंबर है। कई शिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने सालों से क्लास तक नहीं ली। पब्लिकेशन में भी वह पीछे हैं। ऐसे में उनकी एपीआई कैसे पूरी होगी। एपीआई का जुगाड़ हो भी जाए तो विरोधी शिक्षक अड़ंगे का काम करेंगे। कॉलेजों में प्रिंसिपल की एपीआई इन दिनों चर्चा का विषय है।
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