उन्होंने कहा दोनों की बात को तवज्जो भी समाज रूप से देनी होगी। महिलाओं को खुद अपनी ताकत पहचाननी होगी और तब उनके साथ पूरा समाज कारवां बनकर खड़ा होगा। अगर महिलाएं ही बेटे और बेटी में फर्क करेगी तो समाज का क्या कुसूर। शिक्षा अलग चीज है और संस्कार अलग।
यह जरूरी है कि बेटियों को रोकटोक करने के बजाए सही गलत बताएं और संस्कार दें। संस्कार की ताकत ही बच्चों को ऊंचाईयों पर ले जाती है। अमर उजाला ने पुण्य कार्य शुरू किया है। महिलाओं के पास बेहतर मौका है, इस अभियान से जुड़ें और अपने अधिकारियों के प्रति जागरूक बनें। हौंसला दिखाने से सारी मुश्किलें खत्म हो जाती है।
'अपराजिता' अभियान के तहत ग्रोवल पब्लिक स्कूल बड़ौत में पुलिस की पाठशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान सीओ रामानंद कुशवाहा, एसआई चंद्रलेखा और ट्रैफिक पुलिस की टीम ने छात्राओं को यातायात के संबंध में जागरूक किया और उनकी जिज्ञासाओं व सवालों के उत्तर दिया।
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