फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अपराजिता: दहेज पीड़िताओं के लिए ढ़ाल बनीं यूपी की जैमिन चौधरी 

Thu, 22 Nov 2018 09:50 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
विज्ञापन
जैमिन चौधरी
विज्ञापन

ठोकर खाकर तो सभी संभलते हैं, लेकिन दूसरों को संभालने वाले कम ही होते हैं। जैमिन चौधरी भी ऐसी महिलाओं में से एक हैं। दहेज के लिए ससुरालवालों का उत्पीड़न झेल चुकी जैमिन चौधरी दूसरी महिलाओं के लिए ढ़ाल बन गईं। महिलाओं को दहेज उत्पीड़न से निजात दिलाई। कहीं आपसी संवाद से तो कहीं कानूनी कार्रवाई से दहेज के खिलाफ आवाज उठाई। उनके प्रयास से कई दंपतियों का फिर से मिलन हुआ। 

विज्ञापन


कस्बा किरतपुर की रहने वाली जैमिन चौधरी का निकाह करीब आठ साल पहले मोहल्ला कस्साबान के तौफिक से हुआ था। जैमिन चौधरी खुशहाल दांपत्य जीवन के सपने लेकर ससुराल गईं। लेकिन ससुराल की दुनिया उनके सपनों से ज्यादा डरावनी निकली। निकाह के कुछ दिन बाद ही उनके ससुरालवालों ने उन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।

ससुरालवाले दहेज में पांच लाख रुपये मांगने के लिए उत्पीड़न करने लगे और निकाह के पांच महीने बाद ही उन्हें ससुराल से निकाल दिया गया। वे रोती हुईं घर पहुंची। कुछ दिनों बाद पति के खिलाफ केस दर्ज किया, लेकिन पति ने उन्हें बिना तलाक दिए ही दूसरा निकाह कर लिया। उन्होंने आसपास देखा तो दहेज पीड़ित महिलाओं की भीड़ सी नजर आई। इसके खिलाफ आवाज उठाने की ठानी। 

उन्होंने महिलाओं को दहेज उत्पीड़न के खिलाफ जागरूक करना शुरू किया। कई मामलों में मध्यस्थता की और दंपतियों को मिलवाया। जहां ससुरालवाले नहीं माने तो उनके खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज करवाई। पुलिस के डर से इन परिवारों ने भी दहेज को छोड़कर अपनी बहुओं को अपना लिया। आज जैमिन चौधरी पीड़ित महिलाओं के लिए आवाज बन गई हैं। 

जैमिन चौधरी के खिलाफ कई परिवारों ने आवाज उठाई। कई लोगों को महिलाओं के लिए चलाई जा रही उनकी मुहिम पसंद नहीं आई। उन्होंने विरोध किया, लेकिन जैमिन चौधरी डटी रही। जो उनका विरोध करते थे, उनके परिवार की किसी महिला का दहेज के लिए उत्पीड़न होता है तो वे भी जैमिन चौधरी के पास ही जाते हैं। 
विज्ञापन

जैमिन चौधरी पर उनके ससुरालवाले कई बार हमले कर चुके हैं। एक बार तो चाकू से उनकी गर्दन तक रेत दी और केस वापस लेने के लिए दबाव बनाया। लेकिन जैमिन चौधरी ने केस अब तक वापस नहीं लिया है।

जैमिन चौधरी के अनुसार बहुओं से दहेज मांगने वाले अपनी बेटियों के बारे में सोचने लगे तो समाज से दहेज का कलंक मिट जाएगा। उन्होंने दहेज के लिए जो प्रताड़ना झेली नहीं चाहते कि कोई और यह प्रताड़ना झेले। वे दहेज के खिलाफ आवाज उठाती रहेंगी। समाज में भी अब उन्हें सहयोग मिलना शुरू हो गया है। 

क्या है अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल्स

‘अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल्स’ नारी गरिमा के लिए एक साझा मंच तैयार करने की मुहिम है। इसके तहत ऐसा माहौल बनाने की कोशिश होगी जिसमें हर कोई यह सोचने को मजबूर हो जाए कि सुरक्षित समाज हर बच्ची और हर महिला का हक है। समाज का नकारात्मक माहौल हमारे लिए चुनौती है। अमर उजाला ने इस जड़ता को तोड़ने की जिम्मेदारी उठाई है। पर, इसके लिए सबसे बड़ी जरूरत है समुदाय निर्माण यानी कम्युनिटी बिल्डिंग की। ये ऐसा समुदाय होगा जो न केवल सकारात्मक दिशा में सोचे बल्कि नारी गरिमा को लेकर सतर्क और हमेशा प्रयासरत भी हो। आप भी जुड़ें अभियान से इस अभियान से जुड़ने के लिए aparajita.amarujala.com पर लॉगइन करें।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें