- अध्यापिका नाजिया ने कहा जिम्मेदारी का बोझ पड़ा तो ऑटो रिक्शा और ट्रेन चलाने लगी बेटियां, साइंस के साथ अंतरिक्ष को भेद डाला वायु यान को उड़ाने लगी बेटियां।
- छात्रा शबा ने कहा ममता की गोद बन जाती है, जग की जननी कहलाती है, मौत को भी जो मात दे अपराजिता कहलाती है।
- रितिका पंवार ने कहा छात्राएं हिम्मत, जोश और जुनून के साथ अपने अधिकार की रक्षा करें।
- छात्रा कुमारी सिया व अफ्शा ने कहा महिला अपनी शक्ति को भूल चुकी है, वास्तव में नारी अबला नहीं है। हिंदू ग्रंथ भी नारी को शक्ति का दर्जा देते हैं।
इस दौरान बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पर पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया। इसमें छात्राओं ने बेटा और बेटी संतुलन पर शानदार व मार्मिक पेंटिंग बनाकर संदेश देने का काम किया। इसमें गीता, बबीता, कमलेश, निर्मल शिवा, प्रीति ने भी
महिला सशक्तिकरण पर विचार व्यक्त किए।
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