मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने कहा है कि बिना डीजे, डमरू कैसी कांवड़ यात्रा। यानी कांवड़ यात्रा पर डीजे जैसा कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा। हालांकि यह बात अब बेमानी इसलिए है कि सरकार चाहे किसी की रही हो, डीजे पर कभी प्रभावी अंकुश लग ही नहीं पाया। हर बार कांवड़ यात्रा में खूब डीजे बजे। डीजे के कारण कहीं कोई बड़ा बवाल भी नहीं हुआ। इसके चलते ध्वनि प्रदूषण के सारे मानक जरूर छिन्न-भिन्न होकर रह गए।
हर बार कांवड़ यात्रा में डीजे पर प्रतिबंध का फरमान जारी होता है। लेकिन यह प्रतिबंध कभी लग नहीं पाया। चाहे हाल ही में सम्पन्न कांवड़ यात्रा हो या फिर इससे पूर्व की सरकारों के समय में हुई कांवड़ यात्रा। डीजे पर जमकर धमाल रहा। बड़े-बड़े डीजे लेकर शिवभक्त निकलते हैं। डाक कांवड़ आदि का तो आधार ही जैसे डीजे बन गया है। मेरठ, दिल्ली से लेकर हरियाणा के युवाओं के बड़े ग्रुप विशाल डीजे के साथ कांवड़ लाते हैं। हर बार यह चर्चा का विषय बनता है।
सूबे के सीएम योगी ने एक बार फिर से यह कहकर बहस छेड़ी है कि बिना डीजे आखिर कैसी कांवड़ यात्रा। शिवभक्त भी तो यही कहते हैं कि डीजे से आखिर कैसी परेशानी है। इससे सांप्रदायिक माहौल खराब करने का आरोप लगता है। लेकिन सही बात यह कि पिछले काफी वर्षों में डीजे के कारण आसपास कहीं कोई ऐसी घटना नहीं हुई, जिससे माहौल खराब हो गया हो।
ध्वनि प्रदूषण जरूर करता है नुकसान
आंकड़े कहते हैं कि डीजे मानक से कई गुना ज्यादा शोर करता है। नतीजा, इससे बेहद ध्वनि प्रदूषण होता है, जो स्वास्थ्य के लिए घातक है। कांवड़ यात्रा की बात करें तो मेरठ के कई हिस्सों में इस दौरान ध्वनि प्रदूषण दिन में सामान्य से 42 डेसिबल तो रात में 40 डेसिबल ज्यादा दर्ज किया गया। आवासीय श्रेणी के पल्लवपुरम फेज-दो में यह दिन में 20, जबकि रात में 22 डेसिबल ज्यादा रहा। दूसरे स्थान पर रहे बेगमपुल चौराहे पर दिन में सामान्य से 18 और रात में 15 डेसिबल ज्यादा ध्वनि प्रदूषण रहा। कलक्ट्रेट स्थित डीएम ऑफिस पर दिन में ध्वनि प्रदूषण सामान्य से 29 और रात में 22 डेसिबल ज्यादा रहा। रेलवे रोड चौराहे पर भी यह सामान्य से 15 डेसिबल ज्यादा रहा। इसके अलावा कांवड़ यात्रा के दौरान दिल्ली रोड समेत शहर का कोई ऐसा इलाका नहीं बचा, जहां ध्वनि प्रदूषण न बढ़ा हो। दरअसल ध्वनि प्रदूषण के कारण सबसे अधिक परेशानी दिल के मरीजों को होती है। तेज आवाज से कान के पर्दों को नुकसान होता है। इससे व्यक्ति अनिद्रा का भी शिकार हो सकता है। इसके असर से शरीर में बेचैनी बढ़ जाती है। सामान्य से अधिक ध्वनि मनुष्य में कई तरह के रोग पैदा कर सकती है।
यह है स्टैंडर्ड लिमिट (डेसिबल में)
श्रेणी दिन रात
संवेदनशील 50 40
आवासीय 55 45
कॉमर्शियल 65 55
इंडस्ट्रियल 75 70