एएनएम भर्ती में सीएमओ कार्यालय ने बड़ी गड़बड़ी की है। अंतिम सूची जारी करने से पहले वायरल हुई लिस्ट में वे सभी नाम शामिल हैं जो डीएम की लिस्ट में थे। जांच अधिकारी एडीएम वित्त गौरव वर्मा ने रिपोर्ट डीएम पंकज यादव को सौंप दी है। दो बाबू और दो डिप्टी सीएमओ भी कार्रवाई की जद में आ गए हैं।
अमर उजाला ने वायरल हुई लिस्ट का 14 अप्रैल को खुलासा किया था। एक पेज की लिस्ट को प्रकाशित भी किया गया था। खबर प्रकाशित होने के बाद डीएम ने एडीएम वित्त को मामले की जांच सौंपी थी। जांच अधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा था।
सीएमओ कार्यालय ने तर्क दिया कि जिन दो बाबुओं और चिकित्साधिकारियों के नाम लिस्ट में बताए जा रहे हैं, उनमें से कोई भी व्यक्ति न तो एएनएम भर्ती से जुड़ी प्रक्रिया का हिस्सा रहा है और न ही बाकी स्तर पर इन तमाम लोगों का कोई हस्तक्षेप है।
विभाग ने तर्क यह भी दिया थी कि एएनएम भर्ती से पहले साक्षात्कार के लिए चयनित उम्मीदवारों की सूची चस्पा की गई थी, ऐसे में कोई भी व्यक्ति उस लिस्ट के आधार पर नाम लिखकर फर्जी तरीके से ऐसी सूची को तैयार कर सकता है।
साक्ष्यों के आगे कमजोर पड़ा पक्ष
जांच में स्पष्ट किया गया है कि अंतिम सूची और वायरल हुई सूची का मिलान करने पर स्पष्ट होता है कि वो तमाम नाम शामिल हैं, जो चयनित लिस्ट में हैं। इससे साफ होता है कि वायरल लिस्ट पूरी तरह से सही है और विभाग की भूमिका संदिग्ध है। ऐसे में साफ हो जाता है कि स्वास्थ्य विभाग में लिस्ट के नाम पर वसूली की गई है।
एक साल की सैलरी तक वसूली
सूत्र बताते हैं कि लिस्ट के सहारे सीएमओ कार्यालय में सीधे रेट निर्धारित किए गए थे। चयनित होने वाले उम्मीदवारों से एक साल की तनख्वाह बतौर सुविधा शुल्क के नाम पर वसूली गई। इस काम को अंजाम तक पहुंचाने का काम साहब के कुछ पसंदीदा लोगों को दिया गया था।
सीएमओ ऑफिस में खेल जारी
स्वास्थ्य विभाग में धांधली और साल भर तक नियुक्ति प्रक्रिया संचालित रहने को लेकर प्रमुख सचिव अरविंद कुमार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान पिछले साल जमकर फटकार लगाई थी। मारकीन की खरीद में धांधली को लेकर मिशन निदेशक अमित घोष ने स्वयं जांच बैठाई थी, लेकिन उसके बाद भी सीएमओ दफ्तर में धांधली और वसूली का खेल चल रहा है।