ऐसे होता है गुर्दा प्रत्यारोपण
जब किसी मरीज के गुर्दे पूरी तरह से काम करना बंद कर देते हैं, तो मरीज के पास सिर्फ दो ही विकल्प बचते हैं। पहला गुर्दा रोगी लगातार डायलिसिस कराए, दूसरा वह गुर्दा प्रत्यारोपण करा सामान्य जीवन व्यतीत करे। अगर मरीज दूसरा विकल्प चुनता है तो उसे परिवार का कोई सदस्य, रिश्तेदार या दोस्त गुर्दा दान कर सकता है।
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सामान्य तौर पर गुर्दा प्राप्तकर्ता और गुर्दा दाता का ब्लड ग्रुप समान होना चाहिए। डॉ. संदीप गर्ग ने बताया कि इसमें करीब सात लाख रुपये का खर्च आता है। हालांकि ब्लड ग्रुप अलग होने पर भी अब प्रत्यारोपण हो जाता है, लेकिन उसमें साढ़े तीन से चार लाख रुपये खर्च ज्यादा आता है। उसमें दवाइयों का इस्तेमाल बढ़ जाता है।