शामली। भयंकर गर्मी की तपिश से पशुओं के चारे पर भी संकट खड़ा होने लगा है। पशु पालकों द्वारा सूखा भूसा व नया चारा खिलाने से पशुओं को गोबर के बंद, अफारा की शिकायत तेजी के साथ बढ़ने लगी हैं। हर रोज जिले के 27 पशु अस्पतालों में 30 पशु इस रोग की चपेट में आकर पहुंच रहे हैं। चिकित्सक सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
इन दिनों गर्मी पड़ रही है। अधिकतम पारा कभी 38 तो कभी 40 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच रहा है। ऐसे में पशु-पक्षियों के साथ मानव भी पूरी तरह से उसकी तपिश में झुलस रहा है। पशुओं के शरीर में पानी की कमी पाई जा रही है। ऐसे में पशु पालक अपने पशुओं को सूखा, भूसा व नए चारे की सानी करके खिला रहे हैं। पानी की कमी होने के कारण वह पेट में जाकर पशुओं के आंतों से चिपक रहा है। इस कारण पशुओं में गोबर बंद की बीमारी फैल रही है। पशुओं की हालत भी बिगड़ रही है। खास बात यह है कि पशुओं को गर्मी के हिसाब से भरपूर पानी नहीं मिलने से उनके शरीर में पानी की कमी हो रही है। इस कारण भूसा व चारा पेट में ही चिपक रहा है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाॅ. चंद्रभानु कश्यप ने बताया कि बीमारी से बचाव के लिए पशुपालकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। एडवाइजरी भी जारी की जा रही है।
गर्मी में करें पशुओं की देखभाल
- कुछ दिनों तक नए व पुराने चारे को मिलाकर खिलाने की आदत डालें।
- भूसे को सानी करने से पहले लगभग तीन घंटे तक पानी में भिगाए रखें।
- पशु गर्मी की चपेट में न आएं, इनके लिए दिन में पांच बार नहलाएं।
- तीन-चार घंटे से ज्यादा समय तक पशुओं को धूप में न छोड़ें।
- रात में पशुओं के आसपास मच्छरों से छुटकारे के लिए धुंआ करें।
अलग से लगाई गईं हैं ड्यूटियां
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि पशुओं में चल रहे रोगों को देखते हुए तीन अलग से टीमों का भी गठन किया गया है। मोबाइल वैन को भी सूचना पाते ही मौके पर भेजा जा रहा है। जल्द ही जागरूकता कार्यक्रम चलाकर किसानों को जागरूक किया जाएगा, ताकि पशुओं को मौत होने से बचाया जा सके।
- इसलिए होती है समस्या
गर्मियों में पशुओं के शरीर में पानी की कमी हो जाती है। ऐसे में पशु पालकों द्वारा नया चारा व सूखा भूसा खिलाने से वह आंतों से चिपक जाता है। इस कारण गोबर बंद की समस्या उत्पन्न हो जाती है। - डॉ. चंद्रभानु कश्यप, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी शामली।