चंद्रपाल व शहजाद देते थे विवादित संपत्तियों की जानकारी
एसटीएफ के मुताबिक शहजाद मामा और बंबावड़ गांव का चंद्रपाल अनिल दुजाना के प्रमुख सहयोगी हैं। दोनों विवादित संपत्तियों का पता लगाकर दुजाना को जानकारी देते थे। इसके अलावा जिन लोगों को इसकी जानकारी थी वे भी चंद्रपाल और शहजाद से सीधा संपर्क कर अनिल से रुपयों के बदले काम कराते थे। हालांकि फिलहाल पैसे के बंटवारे को लेकर अनिल और शहजाद की अनबन चल रही थी।
कुख्यात गैंगस्टर अनिल दुजाना का भले ही अंत हो गया हो, लेकिन अपराध की दुनिया में उसका खौफ ऐसा था कि कारोबारी से लेकर व्यापारी तक कोई भी उसके सामने आवाज नहीं निकाल पाता था। अनिल दुजाना ने जहां पर भी जेडीएस (जय दादी सती) लिख दिया, वह उसका मालिक बन जाता था। वह कोई कब्जे वाली जमीन हो या फिर किसी की गाड़ी।
जहां लिख दिया जेडीएस, उसका मालिक बन जाता था दुजाना
गैंगस्टर की खास बात यह थी कि वह जिसे भी अपने गैंग में शामिल करता था, पहले उसे जय दादी सती के नाम से शपथ दिलाता था। उसका मानना था कि यह शपथ लेने के बाद कोई भी गैंग सदस्य उसके साथ विश्वासघात नहीं करेगा। जेडीएस उसका कोड बन चुका था, जिससे गैंग का हर सदस्य वाकिफ था। इसके अलावा वह जब भी जेल से बाहर आता था तब अपने गांव दुजाना में जाकर जय दादी सती मंदिर में पूजा भी करता था।
हर वारदात के बाद बोलता था जय दादी सती, हो गया काम
अनिल दुजाना जब भी किसी की हत्या करता या फिर किसी अन्य आपराधिक वारदात को अंजाम देता तो कहता था कि जय दादी सती, हो गया काम। उसकी गाड़ी पर भी जेडीएस लिखा था।
इन कारनामों में माहिर था
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अनिल दुजाना कई तरह के धंधों में लिप्त था। वह अपने नजदीकियों के माध्यम से विवादित प्रॉपर्टी खरीदता था। प्रॉपर्टी में उसका नाम आते ही दूसरा पक्ष पीछे हट जाता था। इसके अलावा अवैध खनन कराना, रंगदारी वसूलना, रेलवे ठेकेदारी और दहशत के बल पर विभिन्न विभागों में कर्मचारियों की नियुक्ति कराना उसका मुख्य काम था।