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क्रोध, लोभ, अहंकार मनुष्य के सबसे बड़े शत्रु : आचार्या श्रुतिकीर्ति

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आर्य स्त्री समाज साकेत की ओर से तीन दिवसीय श्रावणी उपाकर्म महोत्सव
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- दुर्गुणों का त्याग कर सद्गुणों को अपनाने का दिया संदेश
यज्ञ, भजन और प्रवचन का हुआ आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आर्य स्त्री समाज साकेत की ओर से आयोजित तीन दिवसीय श्रावणी उपाकर्म महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को वैदिक यज्ञ, भजन एवं प्रवचन का आयोजन हुआ। इस मौके पर आचार्या श्रुतिकीर्ति वेदरत्न ने विश्वानि देव मंत्र की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष, आलस्य और असत्य मनुष्य के सबसे बड़े शत्रु हैं। यह उसके व्यक्तित्व और उन्नति में बाधा बनते हैं। सत्य, सेवा, परिश्रम, विनम्रता, न्याय और प्रेम जैसे सद्गुणों को अपनाकर ही जीवन को श्रेष्ठ बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ यज्ञ से हुआ। इसमें रेणुका आर्या एवं बलराम चौधरी, गीता देवी एवं किशन लाल कुशवाह, सुमन देवी एवं अशोक कुमार तथा सविता कपूर ने यजमान के रूप में आहुतियां दीं। सामवेद के मंत्रों से विशेष आहुतियां अर्पित की गईं। जबकि कानपुर से आई आचार्या श्रुतिकीर्ति वेदरत्न ने वैदिक मंत्रों की व्याख्या की।
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भजन संध्या में आर्य अलका आर्य ने ईश्वर स्तुति के भजन प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि अहिंसा, धैर्य, क्षमा, मन और इंद्रियों का संयम, सत्य, विद्या, पवित्रता, न्यायप्रियता तथा क्रोध का त्याग ही धर्म के वास्तविक लक्षण हैं। वेद सभी मनुष्यों को सत्य का आचरण करने और निष्पक्ष होकर न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
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कार्यक्रम का संचालन रेणुका आर्या ने किया। इस अवसर पर स्वामी अमितेशानंद, प्रमोद रस्तोगी, सविता, किशन लाल कुशवाह, बलराम, नरेंद्र पाल सिंह, राजेश सेठी, यशपाल सिंह, गंगाराम सिंह, प्रवीण रहे।

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