तो बच सकती थी विभांशु की जिंदगी
भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि जनप्रतिनिधि सक्रिय होते तो विभांशु की जिंदगी बच सकती थी। उनका कहना है कि अपनी सरकार होने के बावजूद हम एक सक्रिय कार्यकर्ता को उचित इलाज नहीं दिला सके। यह पार्टी नेताओं की नाकामयाबी है।
क्वारंटीन के नाम पर नेता खुद शहर से बाहर गए, घरों में कैद कर लिया,लेकिन अधिकारियों पर इस बात का दबाव नहीं बना सके कि विभांशु को बेहतर इलाज मिल सके। कार्यकर्ता दबी जुबान से इसके लिए पूरी तरीके से पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को दोषी ठहरा रहे हैं।
प्रदेश नेतृत्व और मुख्यमंत्री को भेजी रिपोर्ट
सूत्रों के अनुसार संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री से बात की है, वहीं भाजपा के भी कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के साथ साथ मंत्रियों से बात की है। स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर हो रही लापरवाही पर पूरी रिपोर्ट भेजी गई है।
इसके साथ ही लॉक डाउन के दौरान लग रही भीड़ और तमाम बिंदुओं पर संबंधित पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को लेकर भी शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि जल्दी कोई बड़ा एक्शन मेरठ में शासन की तरफ से हो सकता है।