बागपत के सिनौली में उत्खनन से निकले प्राचीन रथ, तलवार, हेलमेट समेत अन्य चीजों को पुरातत्व विभाग के लाल किला स्थित म्यूजियम में रखवाया जाएगा। पुरातत्व विभाग की टीम उत्खनन स्थल से रथ को यहां से सुरक्षित ले जाने की तैयारी में जुटी है। स्थानीय लोगों का भी सहयोग लिया जा रहा है। जमीन की खुदाई कराई जा रही है।
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सिनौली में उत्खनन के दौरान 3800 से चार हजार साल पुरानी सभ्यता के संकेत मिले हैं। यहां पर ताबूत और इसके निकट एक रथ मिला। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह किसी नामचीन परिवार या किसी योद्धा का हो सकता है। रथ पर दुनिया भर के इतिहासकारों में बहस छिड़ी है। उत्खनन का कार्य पूरा हो चुका है। अब इसे सिनौली उत्खनन स्थल से दिल्ली स्थित पुराना किला म्यूजियम में लेकर जाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए आसपास की जमीन को खुदवाकर जस की तस स्थिति में रथ को वाहन में लादकर दिल्ली तक ले जाया जाएगा। दिल्ली में इस पर शोध होगा। पुरातत्व विभाग की टीम सुरक्षित निकाल कर ले जाने की कवायद कर रही है। सिनौली के अलावा बड़ौत के स्थानीय लोगों की मदद ली जा रही है, ताकि रथ को उत्खनन स्थल से निकली स्थिति में ही म्यूजियम तक ले जाया जा सके।
आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया टीम ने निरीक्षण किया
शनिवार को आर्कियोलॉजिकल सर्वे की आगरा शाखा के निदेशक डॉ भूवन विक्रम व सर्वे अफसर राकेश तिवारी उत्खनन स्थल पर पहुंचे और उन्होंने बारीकी से निरीक्षण किया। भारतीय पुरातत्व संस्थान के निदेशक डॉ. संजय मुंजल सिनौली उत्खनन में तीन दिनों से डेरा डाले हुए हैं।
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