कोरोना काल में आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों के लिए आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना ‘वरदान’ बन गई। योजना के तहत पिछले एक साल में कोविड के 3973 मरीजों को निशुल्क इलाज मिला है। इनमें 3954 मरीजों को निजी और 19 को सरकारी अस्पतालों में उपचार मिला। जिले में दो लाख 11 हजार 416 परिवार इस योजना में पंजीकृत हैं। इनमें 89,109 देहात और 1,22,307 शहरी क्षेत्र के हैं।
आयुष्मान को शुरू हुए इस साल सितंबर में तीन साल पूरे हो जाएंगे। इसमें अभी कई खामियां हैं लेकिन कोरोना मरीजों का सालभर में इतनी संख्या में इलाज उपलब्धि है। योजना के पात्र एक परिवार को साल भर में पांच लाख रुपये के मुफ्त इलाज और दवाइयों की सुविधा दी जाती है। योजना का लाभ लेने के लिए आयुष्मान कार्ड बनवाना होता है। आयुष्मान भारत गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए कम्युनिटी हेल्थ सेंटर या जिला कार्यालय से ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसके लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड और फोटो की आवश्यकता होती है।
अस्पताल और लाभार्थी एक नजर में
अस्पताल इलाज वाले मरीज
एनसीआर मेडिकल कॉलेज 2954
सुभारती मेडिकल कॉलेज 1000
संतोष अस्पताल 01
सीएचसी, जानी 11
मेडिकल कॉलेज 07
लगातार मरीजों का कराया जा रहा उपचार
आयुष्मान योजना कोविड के इस दौर में भी मरीजों के लिए निशुल्क उपचार का जरिया बनी है। मरीजों का इलाज लगातार कराया जा रहा है।
- डॉ. पूजा शर्मा, नोडल अधिकारी आयुष्मान योजना व एसीएमओ
आठ लाख अभी भी गोल्डन कार्ड से वंचित
योजना में बेहतर काम के बावजूद जिले में 8,25,870 पात्र लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड नहीं बने हैं। जिले में कुल 10,57, 080 लोगों के गोल्डन कार्ड बनने थे, जिनमें से 2,32,210 (22 प्रतिशत) के ही कार्ड बन सके हैं।
केस - 1
लिसाड़ीगेट के रफीक को कोविड हो गया। गनीमत थी कि आयुष्मान कार्ड था, लिहाजा निजी अस्पताल में भर्ती हुआ। निजी अस्पतालों में कोविड मरीज का हर रोज आठ से 18 हजार रुपये का बिल बनता था।
केस - 2
जागृति विहार की पूनम को कोविड हुआ तो वह निजी अस्पताल में इलाज का खर्च वहन करने की स्थिति नहीं थीं। इनका भी आयुष्मान के तहत निजी अस्पताल में निशुल्क इलाज हुआ। अब वह ठीक हैं।