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अमर उजाला एक्सक्लूसिव: दिल की दुश्मन बनी अधिक उम्र में गर्भावस्था, इन बातों का रखें विशेष ध्यान

Mon, 01 Feb 2021 12:15 PM IST
कपिल kapil शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ
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गर्भवती
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नौकरी का तनाव, सफलता पाने की होड़, करियर और कामकाज के चक्कर में अधिक उम्र में गर्भावस्था माताओं के दिल की दुश्मन बन रही है। चिकित्सकों के पास हाई रिस्क प्रेगेनेंसी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। अधिक उम्र में गर्भधारण के कारण महिलाएं कार्डियोमायोपैथी की शिकार हो रही हैं। 

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बदलती जीवनशैली और देर से परिवार बढ़ाने की सोच महिलाओं को दिल का मरीज बना रही है। गर्भधारण से पहले चिकित्सकों के पास महिलाओं में उच्च रक्तचाप, मोटापा और तनाव बढ़ने के मामले सामने आ रहे हैं, जो दिल की बीमारियों का प्रमुख कारक हैं। यही तनाव, हाई बीपी और मोटापा गर्भावस्था के दौरान जच्चा व बच्चा की जान का खतरा भी बढ़ा रहा है। महिला चिकित्सकों के मुताबिक, उनसे सलाह लेने वाली शहरी क्षेत्र की महिलाओं में यह समस्या ज्यादा है। 

दिल पर पड़ता है जोर, नहीं होती पंपिंग
गर्भवती महिला को खून की सप्लाई ठीक से नहीं होना, हार्ट की पंपिंग न सही होने का असर बच्चे पर आता है। बच्चे को भी उचित ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, खून की सप्लाई नहीं मिलती तो बच्चा मर सकता है। समय से पहले प्रसव और अबॉर्शन का खतरा भी बढ़ता है। बच्चा कमजोर या अपंग हो जाता है। वजन और बीपी अधिक होने से कई महिलाओं में प्रसव से पहले तो कई में प्रसव बाद अचानक सांस फूलना शुरू होता है, जिसकी वजह से दिल फैल जाता है। इसमें मृत्यु भी हो सकती है।
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कार्डियोलॉजिस्ट की देखरेख में डिलीवरी 
दिल की बीमारी की शिकार महिलाओं की डिलीवरी व एनेस्थीसिया का तरीका भी बदलना पड़ता है। इनकी डिलीवरी में हृदय रोग विशेषज्ञ साथ रखते हैं, ताकि जच्चा-बच्चा दोनों को बचा सकें। - डॉ. कंचन मलिक

जांच से पता चलती है दिल की बीमारी
तीन-चार साल पहले तक गर्भवती महिलाओं में तीन फीसद तक दिल की परेशानी 15 प्रतिशत तक पहुंच गई है। लोग अब हर प्रकार की जांच कराते हैं। इस कारण बीमारी पहले पता चल जाती हैं। - डॉ. सपना अग्रवाल

पहली बार गर्भधारण में परेशानी
30 साल के बाद जो युवतियां पहली बार गर्भधारण करती हैं, उनमें खतरा अधिक रहता है। 35 साल के बाद यह समस्या और बढ़ जाती है। बढ़ती उम्र में इसका सीधा असर दिल पर आता है। - डॉ. सरिता त्यागी

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