नजरों के सामने होता रहा निर्माण
इस पूरे मामले में विभागों की भी गर्दन फंसी है। क्योंकि सेटिंग के खेल से आवास एवं विकास परिषद और एमडीए ने पहले तो निर्माण होने दिए। अब जब हाईकोर्ट व शासन का डंडा चला तो विभागों ने कार्रवाई शुरू कर दी, जिससे व्यापारियों में आक्रोश है।
अब शमन नीति से भू-उपयोग परिवर्तन ही हुआ बाहर
शासन ने जो शमन नीति जारी की है, उसमें सिर्फ स्वीकृत नक्शे के विपरीत आंशिक निर्माण का ही शमन करने का आदेश जारी किया है। इस नीति में भू-उपयोग परिवर्तन के मामले को पूरी तरह बाहर रखा है। हाइकोर्ट से भी शासन से इस मामले में जवाब मांगा गया है। ऐसे में अब एक बार फिर से भू-उपयोग परिवर्तन कर हुए तमाम निर्माणों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का संकट गहरा गया है।
हाईकोर्ट में है याचिका दायर
समाजसेवी लोकेश खुराना ने आवास विकास परिषद की योजनाओं में भू-उपयोग परिवर्तन कर हुए निर्माण पर हाईकोर्ट में साल 2016 में जनहित याचिका दायर की थी, जो अभी लंबित है और विभागों को जवाब देते नहीं बन रहा है। दो साल पहले जब सेंट्रल मार्केट में हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई शुरू हुई थी तो संयुक्त व्यापार संघ के बैनर तले शहर के व्यापारियों ने दबाव बनाकर इस कार्रवाई को रुकवा दिया था। तब भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, सांसद राजेंद्र अग्रवाल सहित तमाम जनप्रतिनिधियों ने शासन से शीघ्र ही शमन नीति जारी कराने का वादा किया था।
इसे शमन नीति में शामिल नहीं किया
शमन नीति सिर्फ स्वीकृत नक्शे से अधिक निर्माण पर है। भू-उपयोग परिवर्तन को शमन नीति में शामिल नहीं किया जाता है।
- इश्तियाक अहमद, मुख्य नगर नियोजक एमडीए
आदेश आ जाए, फिर कहेंगे
हमारे पास अभी शासन से शमन नीति के बारे में जानकारी नहीं आयी है। वहां से आदेश आने के बाद ही आगे के बारे में कुछ कहा जा सकता है।
- सतेंद्र पचौरी एसई आवास एवं विकास परिषद
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