एमएमआईटी जसाला में भी सीटें खाली
एमएसआईटी राजकीय पॉलीटेक्निक जसाला में दो साल से चल रहा है। इसमें छात्र-छात्राओं के लिए तीन कोर्स संचालित हैं। इनमें मैकेनिकल प्रोडक्शन में सभी 60 सीटें भरी हैं, जबकि फूड टेक्नोलॉजी में 10 और पेपर एंड पल्प टेक्नोलॉजी में छह छात्र हैं। पिछले सत्र में पेपर एंड पल्प टेक्नोलॉजी में सभी 60 सीटें खाली रह गईं थीं।
छात्राओं में फैशन डिजाइनिंग का क्रेज
पॉलीटेक्निक कॉलेजों में छात्राओं में फैशन डिजाइनिंग एवं गारमेंट टेक्नोलॉजी में सबसे ज्यादा क्रेज है। छात्राओं के सबसे ज्यादा प्रवेश इसी कोर्स में हैं। सत्र 2019-20 में प्रथम व द्वितीय वर्ष में 48-48 व तृतीय वर्ष में 44 छात्राएं रही, जबकि अन्य दो कोर्सों में बहुत कम छात्राएं हैं। फैशन डिजाइनिंग का कोर्स प्रदेश में केवल शामली, झांसी, लखनऊ व बनारस के कॉलेज में ही है।
पॉलीटेक्निक कॉलेज में छात्राओं की संख्या कम होने की प्रमुख वजह जागरुकता की कमी है। 2004 के बाद निजी कॉलेजों का खुलना भी इसका एक कारण है। अब लगभग सभी जिलों में निजी पॉलीटेक्निक कॉलेज हैं, इसलिए कोई अभिभावक बेटियों को दूर के कॉलेज में नहीं भेजना चाहता। कॉलेज स्तर से हर वर्ष युवाओं को जागरूक करने के लिए प्रचार-प्रसार किया जाता है।
- जितेंद्र कुमार, प्राचार्य, राजकीय महिला पॉलीटेक्निक।
पॉलीटेक्निक में रोजगार के अवसर बहुत हैं। राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेजों में छात्रों की संख्या कम होने की वजह निजी कॉलेजों की संख्या अधिक होना है। राजकीय कॉलेजों में सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। सरकार द्वारा छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति, सक्षम बालिका संपन्न परिवार योजना, कन्या सुमंगला योजना और एआईसीटीई द्वारा सक्षम एवं प्रगति स्कीम दी जाती है।
- नवीन कुमार, प्रभारी एमएमआईटी जसाला एवं विभागाध्यक्ष इलेक्ट्रॉनिक्स।
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