प्रदूषण नियंत्रण के लिए एनजीटी के मानकों की सख्ती और डीजल की बढ़ती कीमतों के बाद पेट्रोल और सीएनजी के कोम्बो वाहनों की मांग बढ़ गई है। पेट्रोल और सीएनजी वाहन कम खर्च और कम मेंटीनेंस पर चलते हैं। इनकी संचालन सीमा भी डीजल से अधिक है। यही वजह है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में अब तक शहर में बेचे गए 25,500 वाहनों में पेट्रोल वाहनों का शेयर 80 फीसदी रहा है।
यूरो-6 मॉडल के बाद अप्रैल, 20 से सिर्फ पेट्रोल वाहन ही बाजार में उतारे हैं। मारुति के डीलर जफर खान और टाटा मोटर्स के डीलर विश्वास वासु ने बताया कि डीजल और पेट्रोल के रेट में अब ज्यादा अंतर नहीं रह गया है। पेट्रोल गाड़ियों के मुकाबले डीजल वाहनों की कीमत एक लाख से 1.5 लाख अधिक है। डीजल गाड़ियों में मेंटीनेंस भी अधिक होता है। इन दिनों सीएनजी में मारुति की वैगन-आर और पेट्रोल में स्विफ्ट सबसे ज्यादा पसंद की जा रही है। महिंद्रा और किया के डीलर सिद्धार्थ जैन के अनुसार डीजल गाड़ियों में सीएनजी भी नहीं लगाई जा सकती है। दास हुंडई के मैनेजर मसूद खान ने बताया कि सीएनजी की नियोस और सेंट्रो कार की सर्वाधिक मांग है।
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पेट्रोल-डीजल के वाहनों में प्रमुख अंतर
डीजल पेट्रोल
एनसीआर में चलाने की अवधि 10 साल 15 साल
वाहनों की औसत कीमत 6.5 लाख से 12 लाख रुपये 5 लाख से 10 लाख
वार्षिक मेंटीनेंस खर्च 20 हजार रुपये 12 हजार रुपये
डीजल और पेट्रोल के भाव 77.36 रुपये लीटर 85.98 रुपये लीटर
ये भी जानिए
- डीजल इंजन के मुकाबले पेट्रोल इंजन में कम पार्ट्स लगते हैं। डीजल इंजन ज्यादा गर्मी पैदा करता है
- डीजल गाड़ियों में फ्यूल फिल्टर, एयर फिल्टर, ब्रेक फ्लूड साल में दो-तीन बार बदलवाना पड़ता है
- पेट्रोल गाड़ियों में स्पार्क प्लग होता है। इसे बदलवाने की जरूरत 30 हजार किमी के बाद पड़ती है
- पेट्रोल गाड़ियों में रूटीन सर्विस में इंजन ऑयल और ऑयल फिल्टर ही बदलवाना होता है
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