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अमर उजाला एक्सक्लूसिव: बैंकों में दम तोड़ रहा स्वरोजगार का सपना, पढ़िए ये खास रिपोर्ट

Tue, 15 Sep 2020 10:46 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

  • आवेदनों के मुकाबले बैंकों की स्वीकृति काफी कम
  • बैंकों में दम तोड़ रहा स्वरोजगार का सपना
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Bank Loan - फोटो : pixabay
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विस्तार
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रोजगार के अवसर बढ़ाने और बेरोजगारों के हाथों को काम देने के लिए चलाई जा रहीं रोजगार योजनाएं बैंकों में जाकर दम तोड़ रही हैं। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना (पीएमईजीपी) और मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना (एमवाईएसवाई) के आंकड़े बताते हैं कि स्वीकृत आवेदनों के मुकाबले बैंकों से स्वीकृति बहुत कम है।

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प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना और मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत उद्योग लगाने पर 25 लाख और सेवा क्षेत्र के लिए दस लाख रुपये का ऋण मिलता है। जिला उद्योग केंद्र सहारनपुर के उपायुक्त सिद्धार्थ यादव का कहना है कि लाभार्थियों का चयन करके फाइलें बैंकों को भेज दी जाती हैं, लेकिन बैंक उन्हें लोन देने में कोताही बरत रहे हैं। 

बागपत में भी सरकारी सहायता से ऋण लेकर रोजगार शुरू करना आसान नहीं है। ऋण की जटिल प्रक्रिया के कारण मुश्किलें होती हैं। यही हाल मेरठ, शामली और मुजफ्फरनगर का है।
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प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना
जनपद              स्वीकृत                 बैंकों की आवेदन स्वीकृति
सहारनपुर          490                             39
मेरठ                 370                             37
शामली               71                              19
मुजफ्फरनगर       190                            46
बागपत                105                           13  

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मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना
जनपद            स्वीकृत               बैंकों की आवेदन स्वीकृति
सहारनपुर        138                              06
मेरठ                224                              17
शामली              27                               05
मुजफ्फरनगर     32                                08
बागपत              71                                17 

उधर, बिजनौर में पीएमईजीपी में 1200 लोगों को 100 करोड़ ऋण के रूप में वितरित किए गए हैं। एमवाईएसवाई में 362 लोगों को 102 करोड़ का ऋण दिया गया है। एक जिला एक उत्पाद योजना में 300 लोगों को 50.53 करोड़ का ऋण दिया गया। आत्मर्निभर भारत योजना के तहत 3119 लोगों को 48.50 करोड़ का ऋण दिया गया।

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