केस - 2
स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए जा रहे सामुदायिक शौचालयों के निर्माण में घपला किया जा रहा है। अधिकांश शौचालयों में पानी तक की सप्लाई भी नहीं जोड़ी गई। अधूरे निर्माण पर भी पूरा भुगतान कर दिया गया।
सात शौचालयों में पालिका परिसर में बना शौचालय ही चल रहा है, जबकि अधिकांश शौचालयों में गंदगी का अंबार लगे हुए हैं। गौर करने की बात यह है कि सब कुछ आंखों के सामने होने के बाद भी अधिकारी इस पर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। नगर पालिका की ओर से स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर में सात सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया।
शौचालय में पैसे का बंदर बांट करने के लिए अनुपात से अधिक शीट भी लगाई गई। सामुदायिक शौचालयों में शीट के हिसाब से पेमेंट मिलती है। प्रत्येक फ्लैस शीट का करीब 78 हजार रुपये का बिल बनाया जाता है। थाने के सामने प्राथमिक विद्यालय परिसर में बनाए गए शौचालय में आठ फ्लैस शीट लगा दी गई, लेकिन पानी की सप्लाई आज तक नहीं जोड़ी गई। इससे शौचालय चल भी नहीं पाया और भुगतान कर दिया गया।
इसके अलावा जूनियर हाईस्कूल, हाथीवाला मंदिर, धर्मशाला में बनाए गए शौचालय आज तक चल ही नहीं पाए। उनमें सिर्फ गंदगी के अंबार लगे हुए हैं। इन शौचालयों को कोई देखने को तैयार नहीं है। भारत सरकार के स्वच्छ भारत मिशन को आगे बढ़ाने का जिम्मा स्थानीय अधिकारियों पर है, लेकिन वहीं अधिकारी इस अभियान को पलीता लगा रहे हैं। उनके सामने ही गड़बड़ी हो रही है, लेकिन कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह सारा खेल अधिकारियों की मिलीभगत से ही हो रहा है। लोगों का कहना है कि इसमें पालिका के साथ-साथ स्वच्छ भारत मिशन की देखरेख करने वाले भी संदेह के घेरे में हैं। पालिका परिसर में बना शौचालय ही चल रहा है। थाने व स्वास्थ्य केंद्र में बने शौचालयों की हालत भी खस्ता है।
जानकारी कराकर शीघ्र कराया जाएगा चालू
पालिका चेयरपर्सन फिरोजा खातून के पुत्र प्रतिनिधि राजा अंसारी का कहना है कि बंद शौचालयों की जानकारी कराकर शीघ्र चालू कराया जाएगा। इस तरह की लापरवाही करने वालों की जांच करा कार्रवाई की जाएगी।
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