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एक्सक्लूसिव: प्रशासन की बड़ी लापरवाही, सांठगांठ से लॉकडाउन के दौरान अवैध निर्माण, रेस्टोरेंट तैयार

Mon, 21 Sep 2020 11:27 AM IST
कपिल kapil अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ
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मेनका सिनेमा हॉल के परिसर में बना महफिल नाम का रेस्टोरेंट। अमर उजाला - फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के मेरठ में जिला प्रशासन दो साल से शहर के बीचोंबीच स्थित जिस मेनका सिनेमा हाल और उसके आसपास की जमीन की पैमाइश तो नहीं करा पाया, उसके बराबर में नजूल की जमीन पर अब रेस्टोरेंट खुल गया है। अहम बात यह है कि शनिवार रात शुरू हुए इस रेस्टोरेंट का निर्माण कार्य मिलीभगत कर लॉकडाउन के दौरान पूरा किया गया है।

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नगर निगम और राजस्व विभाग भी बेपरवाह
खसरा नंबर 542 सरकारी अभिलेखों में नजूल में दर्ज है। इसी जमीन पर होटल मेनका बना है। इसके बराबर में होटल अलकरीम है, वह भी नजूल की जमीन में है, जबकि मेनका सिनेमा से आगे की जमीन भी नजूल में दर्ज है। सरकारी अभिलेखों में खसरा नंबर 542 से खसरा नंबर 547 तक नजूल में दर्ज है। 1961 में मेनका सिनेमा हाल जहां पर है, वह जमीन चरनदास के नाम पर थी। इसमें किराएदारी के नाम पर पलटू दर्ज था। 2009 में यह जमीन नादिर अली के नाम पर दर्ज हो गई और उन्हें मेनका सिनेमा हाल का स्वामी बताया गया। नादिर अली के बाद यह जमीन मेसर्स हाईटेक सिटी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर पुरुषोत्तम कुमार चौबे के नाम पर दर्ज हो गई। पूरे मामले में नगर निगम ने जमकर खेल खेला तो राजस्व विभाग भी सरकारी जमीन के रिकॉर्ड को नहीं देख पाया।

व्यापारी नेताओं की मिलीभगत से चला काम
करोड़ों रुपये की इस जमीन पर कब्जे के पीछे शहर के कई सफेदपोशों और व्यापारी नेताओं की मिलीभगत है। इनके अनुचित प्रभाव के चलते ही प्रशासन जमीन की पैमाइश नहीं करा पाया। सूत्रों का कहना है कि यदि पैमाइश कराई जाए तो एसपी सिटी ऑफिस लेकर डीएन कॉलेज के गेट तक की जमीन नजूल की पाई जाएगी।
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आज तक पैमाइश नहीं कराई जा सकी
दो साल पहले मेनका सिनेमा को जब भीतर की तरफ से गुपचुप तरीके से तोड़ना शुरू किया तो मामला चर्चा में आया। इस जमीन पर 2016 में बैंक आफ महाराष्ट्र से करीब पांच करोड़ का कर्ज भी लिया गया। ऐसे में बैंक ने भी इस संपत्ति पर अपना मालिकाना हक जताकर नोटिस चस्पा कर दिया। वहीं मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने भी सील लगा दी। निवर्तमान जिलाधिकारी अनिल ढींगरा ने जमीन सरकारी है या नहीं, इसे लेकर तहसील प्रशासन को पत्र लिख दिया। इसके बाद सेटिंग का ऐसा खेल शुरू हुआ कि दो साल में तहसील की टीम यहां पहुंचकर पैमाइश नहीं कर पाई। चूंकि उच्चाधिकारियों की इस मामले में किसी भी तरह की कार्रवाई की मंशा नहीं थी, इसलिए हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर पैमाइश को टाला जाता रहा।

नौकरशाही के रवैये पर भी उठ रहे सवाल
बताया जा रहा है कि लॉकडाउन के दौरान भीतर से पूरा रेस्टोरेंट तैयार हो चुका था लेकिन इसे शुरू नहीं किया गया। डीएम अनिल ढींगरा का तबादला होने के बाद ही मेनका होटल के आगे की दीवार और शटर तोड़कर रेस्टोरेंट शुरू कर दिया गया। शनिवार की रात आजाद समाज पार्टी के नेता बदर अली ने रेस्टोरेंट का फीता काटकर शुभारंभ किया। आखिर ये कैसे हो गया, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। लोग इसमें नौकरशाही की मिलीभगत की आशंका जता रहे हैं।   

सिर्फ 60 कदम दूर है एसपी सिटी का ऑफिस  
मेनका सिनेमा के पास होटल महफिल का शनिवार रात उद्घाटन हुआ, एसपी सिटी ऑफिस से मात्र 60 कदम दूर है। आश्चर्यजनक है कि बावजूद इसके पुलिस को इस अवैध निर्माण की भनक नहीं लगी। पूरे शहर में चर्चित इस मामले में एमडीए ने सील लगाई थी और भीतर ही भीतर हुए अवैध निर्माण में पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है।

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