चीनी की बंपर रिकवरी के बाद भी मिलें मनमानी नहीं छोड़ रही हैं। चीनी मिलें किसानों को उनकी मेहनत का फल (गन्ना मूल्य भुगतान) नहीं दे रही हैं। मंडल में जिन सात चीनी मिलों की रिकवरी 11 फीसदी के पार चल रही है, उनमें से पांच मिलों ने किसानों का सर्वाधिक गन्ना मूल्य दबा रखा है।
मोदी ग्रुप की मलकपुर मिल ने अभी तक कुछ भी भुगतान नहीं किया है, वहीं मोदीनगर मिल ने एक फीसदी से भी कम भुगतान किया है। बजाज ग्रुप की किनौनी मिल के साथ ही सिंभावली मिल भी भुगतान में फिसड्डी चल रही है। चालू पेराई सत्र में मंडल की चीनी मिलों पर 2610 करोड़ से ज्यादा बकाया हो चुका है, जिसमें मेरठ की चीनी मिलों पर 1129 करोड़ से ज्यादा का बकाया है।
इस समय मंडल का चीनी रिकवरी औसत 10.82 फीसदी चल रहा है। मंडल की 16 चीनी मिलों में सात मिल किनौनी, सकौती, सिंभावली, मोदीनगर, मलकपुर, साबितगढ़ और अगौता तो ऐसी मिलें हैं, जिनकी चीनी रिकवरी 11 फीसदी से ऊपर है। इसमें किनौनी मिल की चीनी रिकवरी सर्वाधिक 11.66 फीसदी चल रही है। इस सबके बावजूद इन मिलों में साबितगढ़, अगौता और सकौती को छोड़कर बाकी चार मिलों ने सबसे कम गन्ना मूल्य भुगतान किया है। ज्यादा लाभ कमाने के बाद भी ये चीनी मिलें किसानों को उनका भुगतान नहीं कर रही है। इसके चलते इन मिल क्षेत्र के किसानों में भारी रोष व्याप्त है।
नोटिस देकर किया अलर्ट
किनौनी, मलकपुर, मोदीनगर और सिंभावली मिल की रिकवरी 11 से ऊपर आ रही है। इसके बावजूद ये मिल गन्ना मूल्य भुगतान करने में विलंब कर रही है। इन मिलों को नोटिस देकर अलर्ट किया गया है। अगर भुगतान तेज नहीं किया तो कार्रवाई की जानी तय है।
- राजेश मिश्र, उप गन्ना आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र
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