क्या है एफपीओ
डॉ. रितेश शर्मा ने बताया कि कोई भी किसान अकेले निर्यात नहीं कर सकता है। इसलिए केंद्र सरकार ने जोर दिया है कि वह एफपीओ, फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन बनाए और सभी को साथ लेकर निर्यात को बढ़ावा दे। अभी तक मेरठ मंडल में करीब 82 एफपीओ हो गए हैं। धीरे-धीरे प्रदेश और अन्य प्रदेशों में भी इसे बढ़ाया जा रहा है।
कैसे बनते हैं निर्यातक
बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रितेश शर्मा ने बताया कि इसके लिए आईईसी (आयात-निर्यात कोड) को डीजीएफटी डॉट जीओवी डॉट इन साइट पर जाकर आईईसी ऑनलाइन प्राप्त किया जा सकता है।
दूसरे चरण में आईईसी मिलने के बाद एपीडा, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण का सदस्य बनना होता है। एपीडा डॉट जीओवी डॉट इन साइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर (आरसीएमसी) पंजीकरण सह सदस्यता प्रमाणपत्र लेना होता है जिसके बाद निर्यात किया जाता है।
यहां हो गई वर्कशॉप
डॉ. रितेश शर्मा ने बताया कि बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगना, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, यूपी, हिमाचल आदि में वर्कशॉप हो गई है। अन्य जगह पर भी वर्कशॉप की जा रही है। किसान बासमती के अलावा गुड़, शक्कर, आम, शहद, हरी सब्जी समेत अन्य कृषि उत्पादों का निर्यात पश्चिमी उत्तर प्रदेश से कर सकेंगे।