रमजान के आखिरी जुमा अलविदा पर शहर की सभी मस्जिदों में बड़ा ही खूबसूरत नजारा दिखा। मस्जिदें नमाजियों से पूरी तरह भर गईं। दोपहर 12.45 से लेकर 2.40 बजे तक जुमे की नमाज अदा की गई और भीषण गर्मी व उमस के बावजूद खूब नमाजी उमड़े। कुछ मस्जिदों में तो जगह कम पड़ गईं। मस्जिदों की छत और बाहर सफें बिछाकर तेज धूप में बड़ी शिद्दत के साथ नमाज पढ़ी गई।
शाही जामा मस्जिद में शहर काजी जैनुस साजिदीन ने खुतबे में कहा कि हर हैसियतमंद को ईद की नमाज से पहले गरीबों को सदका और फितरा अदा कर देना चाहिए। ईद मनाने से कोई भी गरीब बचा न रह जाए। शहर काजी ने कहा कि फलस्तीन के नागरिकों पर जो जुल्म हो रहा है, वह सरासर गलत है।
हमारी भारत सरकार से फलस्तीन के लोगों की मदद करने की अपील है। इसके साथ तरक्की के लिए मेरठ का स्मार्ट सिटी बनना जरूरी है। हर मजहब, समाज और दल के लोग एकजुट होकर शहर को स्मार्ट बनाएं। कारी शफीकुर्रहमान ने इस्लामी तालीमात पर रोशनी डाली। दरियागंज शाने इलाही मस्जिद के इमाम मौलाना जिब्राईल ने कहा कि आज अल्लाह का शुक्र अदा करने का दिन है, जिसने हमें यह मुबारक महीना दिया। हमें नमाजें पढ़ी, रोजे रखे, तरावीह और शबीने पढ़े। इस सबका सवाब रमजान के महीने में आम दिनों से हजारों गुना ज्यादा है।
इस्लामाबाद की बिसातियान मस्जिद के मौलाना साबित, हौज वाली मस्जिद खैरनगर के कारी ताहिर, अख्तर मस्जिद के इमाम मौलाना आमिर, जलीकोठी कुरैशियान मस्जिद के मौलाना साबिर कासमी, चौक मकसूद अली मस्जिद के कारी अनवार, इमलियान मस्जिद के मौलाना इमरान ने जुमा अलविदा की नमाज पढ़ाई और अल्लाह तआला से रो-रोकर दुआएं मांगीं।