अलकरीम होटल का मुद्दा इन दिनों गर्माया हुआ है। एमडीए ने एक बार फिर इसके ध्वस्तीकरण की तारीख तय कर दी है। एक अप्रैल को होटल गिराया जाएगा। वहीं अलकरीम के मालिक का ही रेलवे रोड चौराहे स्थित दूसरा होटल ओडिसी भी अवैध है। इसका निर्माण भी मनमाने तरीके से किया गया है। सबसे अहम बात ये है कि इसमें पार्किंग की सुविधा तक नहीं है।
होटल अलकरीम जहां नगर निगम की जमीन पर अवैध रूप से निर्मित हुआ है, तो होटल ओडिसी के निर्माण में नियम ताक पर रख दिए गए। एमडीए अधिकारी आंख बंद किए बैठे रहे और स्वीकृत मानचित्र के विपरीत पूरी तरह निर्माण हो गया। एमडीए अधिकारियों ने मानचित्र स्वीकृत करते हुए यह भी नहीं देखा कि होटल में पार्किंग की भी कहीं व्यवस्था है या नहीं।
ये है होटल की स्थिति
दिल्ली रोड पर होटल ओडिसी का निर्माण कुछ गजब किया गया है। एक दुकान में आफिस तैयार कर उसके भीतर से बड़ी सीढ़ियां ऊपर जाने के लिए बनाई गई हैं। दुकानों के ऊपर पूरा होटल बना है। इसमें रेस्टोरेंट के साथ ही कमरे हैं। लेकिन किसी भी होटल के मानचित्र स्वीकृत कराने के लिए जरूरी पार्किंग की इसमें कोई व्यवस्था नहीं है। न ही इसके आसपास कोई ऐसी जगह है, जहां गाड़ियां खड़ी की जा सकें। गाड़ियां रोड पर ही खड़ी होती हैं।
एमडीए अधिकारियों पर भी उठ रहे सवाल
होटल निर्माण को लेकर सच संस्था के अध्यक्ष संदीप पहल एडवोकेट ने शिकायत की है। उनका कहना है कि एमडीए अधिकारी होटल ओडिसी का मानचित्र स्वीकृत होने की बात कह रहे हैं, लेकिन मानचित्र स्वीकृत करते वक्त यह क्यों नहीं देखा गया कि इसकी पार्किंग के लिए जगह कहां है। यदि पार्किंग नहीं है तो नक्शा कैसे स्वीकृत कर दिया गया। दूसरी बात जब निर्माण हुआ तो एमडीए अधिकारियों ने यह क्यों नहीं देखा कि निर्माण मानक के अनुरूप हुआ है या नहीं। संदीप पहल के अनुसार किसी भी निर्माण में कम से कम 30 प्रतिशत जगह खाली छोड़नी होती है, लेकिन इस होटल में शतप्रतिशत निर्माण हुआ है।
वर्जन.....
मैंने मंडलायुक्त से इस मामले में शिकायत की है। इसके लिए एमडीए पूरी तरह दोषी है। इस अवैध निर्माण को ध्वस्त कराने की मांग की गई है। - संदीप पहल एडवोकेट
मेरी जानकारी में यह मामला नहीं है। शिकायत आने पर इसकी जांच कराई जाएगी। जो भी अवैध निर्माण हैं, उन्हें ध्वस्त किया जाएगा। - कुमार विनीत, सचिव एमडीए
अलकरीम पर सुनवाई आज
होटल अलकरीम प्रकरण में एमडीए बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखेगा। अपर सचिव एमडीए बैजनाथ इसमें काउंटर फाइल करेंगे। एमडीए हाईकोर्ट में पक्ष रख रहा है कि इस प्रकरण पर सिविल कोर्ट से स्टे है। हालांकि वह निगम के साथ चल रहे वाद में है। एमडीए उसमें पार्टी नहीं है। ऐसे में हाईकोर्ट से ही आगे के लिए गाइड लाइन देने की गुजारिश की जाएगी।