पुलवामा हमले में शहीद हुए बसा टीकरी के जवान अजय कुमार की तेरहवीं में सोमवार को सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से श्रद्घांजलि दी। इस दौरान स्कूल के 300 छात्र-छात्राएं नंगे पैर हाथों में फूल लेकर पहुंचे तो हर आंख नम हो गई। लोगों ने कहा कि देश केलिए मर मिटने वाले इस लाडले पर सभी को गर्व है। रालोद केअध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने भी शहीद अजय के घर पहुंचकर उनके माता-पिता को सांत्वना दी।
पतला के आईटीआई कॉलेज के ग्राउंड पर सोमवार सुबह शहीद अजय कुमार की तेहरवीं की रस्म अदायगी हुई। शोक सभा में सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे। सुबह दस बजे गुरुकुल प्रभात आश्रम टीकरी के आचार्यों ने आहुति देकर शहीद अजय को श्रद्घांजलि दी। इस दौरान अजय के पिता चौधरी वीरपाल सिंह भावुक हो गए। शोक सभा में आए लोगों ने कहा कि अजय कुमार की शाहदत पर आने वाली पीढ़ियां गर्व करेंगी। चौधरी वीरपाल सिंह केपरिवार के इस बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता है। लोगों ने कहा कि इस लाडले पर हम सबको हमेशा गर्व रहेगा। दो मिनट का मौन रखकर सभी ने शहीद को श्रद्घांजलि दी और उनकी फोटो पर पुष्प अर्पित किए। इस दौरान मुनेश बाफर, कुवंरपाल राणा, विजेन्द्र प्रमुख, सोनू पूनियां, आईटीआई के प्रबंधक गजेन्द्रपाल सिंह, राजेन्द्र चिकारा, गजेन्द्र सिंह नीलकंठ, चैयरमेन मनोज शर्मा, जानी ब्लाक प्रमुख अनिल, पूर्व ब्लाक प्रमुख व भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष भूपेंद्र बाफर आदि सहित सैकेडों ग्रामीण मौजूद रहे। तेरहवीं के दौरान फार्म किड्स एकेडमी लौहड्डा के चैयरमेन डॉ. जितेन्द्रवीर चिकारा ने शहीद के परिवार के बच्चों को बगैर फीस पढाने की घोषणा की। वही मोदीनगर से भाजपा विधायक मंजू सिवाच ने शहीद के परिवार को अपने अस्पताल में फ्री चिकित्सा सेवा देने की घोषणा की।
स्टेडियम का नाम होगा शहीद अजय कुमार स्टेडियम
आईटीआई कॉलेज के प्रबंधक गजेंद्र सिंह और डिग्री कॉलेज प्रबंध समिति केसचिव राजेंद्र चिकारा ने बताया कि शहीद अजय की प्रतिमा के लिए डिग्री कॉलेज की तरफ से जगह सुनिश्चित कर दी गई है। इसके लिए प्रशासन को पत्र भेजा गया है, जल्द ही यहां पर प्रतिमा लगवाई दी जाएगी। इसके अलावा आईटीआई स्टेडियम का नाम शहीद अजय कुमार स्टेडियम रखे जाने का प्रस्ताव पास करते हुए शासन को भेज दिया गया है। ताकि स्टेडियम में आने वाले युवाओं के दिलों में शहीद अजय हमेशा जिंदा रहें।
शहीद अजय के बेटे को देखकर भावुक हुए चौ. अजित सिंह
रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने शहीद के घर जाकर उन्हें श्रद्घांजलि दी और उनके माता-पिता से मुलाकात की। उन्होंने शहीद अजय के पिता चौधरी वीरपाल सिंह और माता कमलेश से कहा कि इस दुख की घड़ी में रालोद हर तरह से उनकेसाथ है। अजय के ढाई साल के बेटे आरव को देखकर चौधरी अजित सिंह भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यहइतना छोटा कि इसको तो ये भी पता नहीं है कि ये क्या हो गया है। इसकेबाद चौधरी अजित सिंह ने आईटीआई ग्राउंड पहुंचकर हवन में आहुति दी। स्टेडियम मौजूद पुलिसकर्मियों ने भी शहीद अजय को श्रद्घांजलि दी।
300 छात्र-छात्राओं ने अर्पित किए पुष्प
पतला के डीजीआर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल के 300 छात्र-छात्राएं स्कूल से आईटीआई ग्राउंड तक नंगे पैर हाथों में गुलाब केफूल लेकर पहुंचे। छात्र-छात्राओं ने हवन में आहुति देने के बाद पुष्प अर्पित किए तो सबकी आंखें नम हो गईं।
अजय के पिता बोले, शाहदत पर सिर्फ भाषणबाजी हो रही, एक्शन नहीं
मेरठ। जवानों की शाहदत केबाद नेता सिर्फ भाषणबाजी कर रहे हैं, लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया। आज भी कश्मीर में सेना पर पत्थरबाजी हो रही है, फिर भी सरकार कुछ नहीं कर रही है। हमारा बेटा शहीद हो गया, लेकिन आज तक सरकार की तरफ से कोई आश्वासन नहीं दिया गया। यह दर्द है पुलवामा में शहीद हुए अजय कुमार के पिता चौधरी वीरपाल सिंह का।
सेना में सूबेदार रहे चौधरी वीरपाल सिंह ने कहा बेटे की शहादत के बाद भी आज तक उन्हेंसरकार की तरफ से किसी तरह का कोई आश्वासन नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि उनकेघर पर आज तक एडीएम, एसडीएम और तहसीलदार से बड़ा कोई अफसर नहीं पहुंचा। स्थानीय स्तर पर तो नेता आए, लेकिन केंद्र सरकार की तरफ से किसी ने भी नहीं पूछा। उन्होंने कहा कि सब नेता वोटों की राजनीति कर रहे हैं। सरकार की तरफ से अभी तक उनको किसी भी तरह का कोई आश्वासन नहीं दिया गया है। चौधरी वीरपाल सिंह ने कहा किप्रदेश केमुख्यमंत्री का आना तो दूर उन्होंने आज तक उनसे बात तक नहीं की है। नेता सिर्फ बयानबाजी कर रहे हैं। जवानों की शाहदत के बाद देशभर में नेताओं के बड़े-बड़े भाषण चल रहे हैं, लेकिन असल में कश्मीर में कुछ नहीं किया जा रहा है। अभी भी पत्थरबाज सेना पर पत्थर बरसा रहे हैं। उनके खिलाफ सख्त कानून बनाएं। धारा 370 को हर हाल में खत्म किया जाना चाहिए। वीरपाल सिंह ने कहा कि अभी तो हम इस सदमे से ही नहीं उबर पाए हैं, लेकिन अगर सरकार इसी तरह शहीदों के परिवार की अनदेखी करती रही तो वे कलक्ट्रेट पर धरना देंगे।
लोग बोले, दिल्ली में एक करोड़ तो यहां क्यों नहीं
इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने कहा कि शहीद अजय कुमार के परिवार को सरकार की तरफ से 25 लाख रुपये की राशि दी गई है, लेकिन केंद्र सरकार की तरफ से कोई बात नहीं की गई है। लोगों ने कहा कि जब दिल्ली के मुख्यमंत्री शहीदों को एक करोड़ रुपये सहायता राशि दे रहे हैं तो इतना राजस्व देने वाले प्रदेश में 25 लाख ही क्यों। राजस्थान जैसे प्रदेश में भी यहां से ज्यादा सहायता राशि दी जा रही है।
प्रदेश गन्ना राज्य मंत्री ने भी दी श्रद्घांजलि
जानीखुर्द। प्रदेश सरकार में गन्ना राज्य मंत्री सुरेश राणा सोमवार शाम शहीद अजय कुमार की तेरहवीं पर बसा टीकरी गांव में उनके घर पहुंचे। सुरेश राणा ने शहीद के परिवार को सांत्वना देते हुए हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
मंत्री के साथ विधायक जितन्द्र सतवई और जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष मनिंदरपाल सिंह भी थे। सभी ने शहीद की फोटो पर पुष्प अर्पित कर श्रद्घांजलि दी। सुरेश राणा ने शहीद के पिता वीरपाल सिंह से कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें अपने प्रतिनिधि के रूप में भेजा है। राणा ने शहीद की मां कमलेश और पत्नी प्रियंका को भी ढांढस बंधाया। उन्होंने शहीद के ढाई साल के बेटे आरव को गोद में लेकर दुलारा। उन्होंने वीरपाल सिंह को आश्वासन दिया कि सरकार द्वारा जितनी भी मदद की घोषण की गई है वह सभी पूरी की जाएगी। इस दौरान ग्रामीणों ने शहीद अजय के नाम पर गांव में एक अस्पताल खोलने की मांग की। मंत्री ने इस संबंध में मुख्यमंत्री से बात करने का आश्वासन दिया। इस दौरान विजेन्द्र प्रमुख, नीरज, अभिमन्यु सांगवान, योगेन्द्र कुसैडी, जोगेन्द्रपाल सिंह आदि भी मौजूद रहे।
मेहनत करूंगी, बेटे को बनाऊंगी फौज में अफसर
मेरठ। सात दिन से रोते-रोते आंखें सूज गईं। रोना बंद करती हैं तो सोचना शुरू कर देती हैं। सोचते-सोचते अचानक बेटे आरव और सास कमलेश को देखती हैं तो सिसकियां फिर से सुनाई देने लग जाती हैं। अजय की पत्नी वीर नारी प्रियंका का दुख इतना भारी है इसे बताया नहीं जा सकता। लेकिन दुख की इस घड़ी में भी इस वीर नारी का हौंसला कम नहीं है। प्रियंका अपने बेटे आरव को भी उसी सेना में अफसर बनाना चाहती हैं जहां पर उनके पति शहीद हो गए।
मुरादनगर केसलेमाबाद निवासी सेवकराम की बेटी प्रियंका उर्फ डिंपल की शादी को आने वाली नौ मार्च को चार साल पूरे होने वाले हैं, लेकिन 18 फरवरी की सुबह आई मनहूस खबर ने इस पूरे परिवार की खुशियां उजाड़कर रख दीं। प्रियंका समझ नहीं पा रही हैं, आगे क्या होगा। इतने बड़े दुख के बावजूद उसका बस यही कहना है कि मेरा सपना अब बस अजय के सपने को पूरा करना है। बेटे को बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाकर उसे सेना में अफसर बनाना है। शहीद अजय के तेरहवीं के बाद गमगीन प्रियंका ने यही कहा कि मैं मेहनत करूंगी, लेकिन अपने बेटे को सेना में अफसर बनाऊंगीं। जिस तरह अजय परिवार का ख्याल रखते थे, अब मैं अपने सास-ससुर ख्याल रखूंगी। इतना कहने के बाद वह फफकने लग जाती हैं।
रोज बिगड़ जाती है तबियत
प्रियंका पांच महीने की गर्भवती हैं। ऐसी हालत में दिन-रात रोने से उनकी तबियत बिगड़ रही है। खाने को भी उनको जबरन दिया जा रहा है। सभी बस यही समझा रहे हैं कि अजय देश के लिए शहीद हुए हैं, वह हिम्मत करके खड़ी हों और परिवार को संभालें।
गांव में हर परिवार गमगीन
शहीद अजय की तेरहवीं पर दिनभर गांव में मातम पसरा रहा। सुबह से शाम तक शहीद के घर से रोने की आवाजें सुनकर पूरे गांव में गम का माहौल रहा। हर कोई इस परिवार के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहा था।
मैंने तो खो दिया...क्या और मां भी अपने लाल खो दें
मेरठ। बेटे की तेहरवीं के दौरान अजय की मां कमलेश का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। वह बस इस सोच में थीं कि अब आगे क्या होगा। सरकार को लेकर उनके दिल में बड़ा दर्र्द था। उन्होंने कहा कि उनका बेटा शहीद हो गया, लेकिन आज भी सेना पर कश्मीर में पत्थर बरस रहे हैं। वहां से धारा 370 नहीं हटी है। कमलेश ने कहा कि मैंने तो अपना लाल खो दिया लेकिन क्या देश की बाकी मां भी अपने लाल खो दें।
18 फरवरी से सोमवार तक शहीद अजय कुमार के घर पर सिसकियां नहीं रुकी। कोई क्षण ऐसा नहीं बीता जब इस घर में आंसुओं का सैलाब नहीं बहा हो। रोते-रोते हुए अजय की मां कमलेश, पत्नी प्रियंका, बहन अर्चना समेत सभी रिश्तेदारों की हालत खराब है। सोमवार को अजय की तेरहवीं पर घर में हुए हवन में पोते आरव ने आहुति दी तो वे बिलख पड़ीं। रोते-रोते बार-बार यही बोलतीं रहीं कि इसको तो यह भी नहीं पता कि इसका नीतू भईया चला गया है। उनकी इस हालत को देखकर हर शख्स की आंखों में आंसू थे। अजय के पिता भी इस क्षण सिसकने लगे, किसी तरह लोगों ने उनको संभाला। शोक सभा केबाद अजय की मां के दिल का गुबार बाहर आ गया। उनकी आवाज में गुस्सा झलक रहा था। उन्होंने कहा कि अभी तक सरकार ने कुछ नहीं किया है। कश्मीर में आज भी वही हालात हैं, सरकार कुछ करती क्यों नहीं है। अगर सरकार ने कश्मीर में कुछ नहीं किया तो कौन मां अपने बेटों को सेना में भेजेगी।
रोते-रोते सो गया मासूम
सुबह से दोपहर तक शहीद के घर पर लोगों का तांता लगा था। मातम इतना था कि ढाई साल का मासूम आरव सबको रोते देख बिलखने लगा। दोपहर तक वो इतना रोया कि रोते-रोते दादी की गोद में ही सो गया। जो भी उसे देखता अपने आंसू नहीं रोक पाता।