इस तरह तो हम अपने देश के हथियार नष्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तीन सौ से ज्यादा आतंकवादी मारे गए हैं लेकिन आप जरा सोचिए कि आतंकवादियों में इतनी अक्ल तो होगी कि वह सोच सकें कि भारत कुछ बड़ा करेगा, तो वे पहले ही चौकन्ने थे और अपने बेस से हट गए होंगे। संतुष्टि तभी मिलेगी जब आतंकवादी मरेंगे। इसका जब तक कोई प्रमाण नहीं मिलता तब तक हमें नहीं लगता कि हम संतुष्ट हो पाएंगे।
प्रदीप की पत्नी शर्मिष्ठा ने कहा कि आधिकारिक तौर पर किसी आतंकवादी के मरने की पुष्टि नहीं है तो कैसे मान लें कि तीन सौ आतंकी मारे गए हैं। पुलवामा हमले में आंखों के सामने जवानों को मरते हुए देखा लेकिन उनका तो कोई नुकसान नहीं हुआ।
शहीद के पिता जगदीश ने कहा कि मुझे दुख भी है लेकिन खुशी है कि देश के प्रधानमंत्री ने जिस तरह मीटिंग बुलाई गई थी तो लग रहा था कि कुछ बड़ा होगा। मुझे अपने बेटे के शहीद होने का दुख भी है और गर्व भी है। मुझे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उम्मीद भी है कि आगे भी इस तरह की कार्रवाई होती रहेगी, जिससे आतंकवाद का पूरी तरह सफाया हो।
शहीद अमित की माता उर्मिला व पिता सोहनपाल व
रेलपार कॉलोनी निवासी शहीद जवान अमित के पिता सोहनपाल ने कहा कि जो कार्रवाई हुई है इससे हम सहमत हैं लेकिन इसमें आम आदमी की जान नहीं जानी चाहिए। आतंकवादी ठिकानों को ही तबाह करना चाहिए। मेरा मानना है कि जब तक कश्मीर के हालात ठीक नहीं होंगे, तब तक पाकिस्तान सही नहीं होगा। पुलवामा हमले के बाद जवाबी कार्रवाई के बाद सेना का गौरव बढ़ा है।
शहीद अमित की मां उर्मिला देवी ने कहा कि हमारे बेटे के साथ जो हुआ वो किसी के साथ नहीं हो। आतंकवादियों से बदला लेना चाहिए।
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