दिल्ली के मौसम विज्ञान केंद्र के स्कॉलर अग्रिम तोमर कहते हैं कि हवा की गुणवत्ता बेहद खराब है। दिवाली के बाद से प्रदूषण का स्तर बेहद खराब हो गया है। लोगों को सांस लेना तो दूभर हो ही गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की पिछले पांच साल की रिपोर्ट की मानें तो यह क्षेत्र सबसे प्रदूषित 10 क्षेत्र में शामिल है। स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने से या निर्माण कार्य बंद करने से गवर्नमेंट, जनता को प्रदूषण से होने वाले दुष्प्रभाव से कुछ हद तक तो बचा पाई हैं परंतु अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई। वातावरण प्रदूषण के कई रूप हैं, जिसमें से वायु प्रदूषण सबसे जटिल और गंभीर है।
वायु प्रदूषण सर्दियों में ज्यादा दिखाई देता हैं क्योंकि ठंड होने के कारण वायु स्थिर हो जाती है और सतह के पास बैठ जाती है। पटाखों, भट्टों और पराली को जलाने इत्यादि के कारण उत्पन्न हुआ हैं। जिले में प्रदूषण भट्टों और पटाखों से निकलने वाले धुएं एवं हरियाणा और पंजाब में जलने वाली पराली से होता है। इससे सांस लेने में समस्या होती है, खांसी रहती है, शरीर का रक्तचाप बढ़ जाता है और पक्षाघात का खतरा भी बढ़ जाता है। अग्रिम का कहना है कि शहर में इतना वायु प्रदूषण है जैसे कोई व्यक्ति रोजाना 18 सिगरेट पी रहा है।
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/