यदि आप डेंगू और चिकनगुनिया से बचे हुए हैं तो ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि बड़ी संख्या में ‘एडिस एजिप्टी’ मच्छर सक्रिय हैं। मलेरिया विभाग की तरफ से तैयार रिपोर्ट बता रही है कि बाकी मच्छर बीते सालों की तुलना में कम हुए हैं, लेकिन एडिस मच्छर की संख्या बढ़ी है। खास बात यह है कि शहर से लेकर जिले के एक हिस्से में एडिस एजिप्टी की मौजूदगी सबसे ज्यादा देखी जा रही है। उधर, मलेरिया को जन्म देने वाला मादा एनोफिलिस मच्छर समिति स्तर तक ही दिखाई दे रहा है।
जिला मलेरिया विभाग ने शास्त्रीनगर, मेडिकल कॉलेज कैंपस और अजंता कॉलोनी के साथ शास्त्रीनगर में उन घरों का निरीक्षण किया जहां डेंगू और चिकनगुनिया के केस पकड़े गए। इन घरों में से करीब 80 फीसदी घरों के अंदर साफ पानी भरा हुआ मिला। जिनके अंदर जांच करने पर लार्वा भी पाया गया। दरअसल साफ पानी के अंदर एडिस एजिप्टी मच्छर ही पनपता है। उधर, स्वास्थ्य विभाग चिकित्सा कैंप में उन मरीजों के खून लेकर स्लाइड बना रहा है जो बुखार से पीड़ित है। इन मरीजों में से एक भी मलेरिया का नहीं मिला।
जबकि 12 मरीजों में एलाइजा टेस्ट के बाद चिकनगुनिया की पुष्टि हुई। जिला मलेरिया अधिकारी योगेश सारस्वत का कहना है कि स्लाइड रिपोर्ट से साफ हो जाता है कि मलेरिया को फैलाने वाली मादा एनोफिलिस मच्छर कम हैं। बीते वर्षों के दौरान डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया के मरीजों में 80 फीसदी तक अकेले मलेरिया के मरीजों की रहती थी, लेकिन इस बार चिकनगुनिया के सबसे ज्यादा केस दर्ज किये जा रहे हैं।
इन क्षेत्रों में खासा असर
सबसे पहले मेडिकल कॉलेज कैंपस के अंदर एडिस एजिप्टी मच्छर की मौजूदगी की पुष्टि हुई। इसके बाद इसका दायरा बढ़ा और मेडिकल से सटे जागृति विहार, अजंता कॉलोनी, शास्त्रीनगर में चिकनगुनिया व डेंगू के केस सामने आये। अब माछरा, परीक्षितगढ़ के अलावा शहर में शेरगढ़ी, तेजगढ़ी से लेकर मंगल पांडे नगर तक इसकी मौजूदगी दर्ज की जा रही है।
क्या है एडिस एजिप्टी मच्छर ?
एडिस एजिप्टी मच्छर को मेडिकल साइंस के अंदर बुरा मच्छर भी कहा जाता है। इसके काटने से डेंगू और चिकनगुनिया दोनों हो सकते हैं, क्योंकि यह दोनों वायरल वाला होता है। हालांकि अभी तक वैज्ञानिक यह नहीं जान पाये हैं कि एडिस मच्छर के काटने से किसी को डेंगू तो किसी को चिकनगुनिया क्यों होता है, यह महज इत्तफाक है या फिर कोई वैज्ञानिक कारण।
एडिस एजिप्टी मच्छर की विशेषज्ञता
यह स्वच्छ पानी में पाया जाता है, जहां पानी मिट्टी के संपर्क में होगा उसमें यह मच्छर नहीं पैदा होगा। बल्कि कूलर या फिर किसी अन्य बर्तन में भरे पाने के अंदर ही यह पैदा होता है। दावा तो यह भी किया जाता है कि यदि एडिस एजिप्टी मच्छर का अंडा एक साल तक खाली बर्तन में पड़ा रहे और उसके बाद पानी के संपर्क में आ जाए तो फर्टिलाइज हो जायेगा। अध्ययन बताता है कि यह मच्छर दिन में ही काटता है। मैग्निफाइंग ग्लास के अंदर डालकर मच्छर को देखें तो इसके शरीर पर सफेद धारियां स्पष्ट दिखाई देगी जो इसकी खास पहचान है।
एनोफिलिस मच्छर
मलेरिया एनोफिलिस मच्छर के काटने से होता है वो भी सिर्फ मादा मच्छर के काटने से। नर मच्छर के काटने से मलेरिया नहीं फैलता है, जिसकी मौजूदगी इस बार बाकी सालों से कम ही देखी जा रही है।