मेरठ। पद्म श्री लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने पत्रकार वार्ता में कहा कि जिस दौर में हमने संगीत सीखा, वह अलग युग था। आज शास्त्रीय संगीत के प्रति रुचि कम होने का कारण संस्थानों और लोगों का हिम्मत हारना है। संगीत की गहराई को योग से जोड़ते हुए मालिनी ने कहा कि पूरी दुनिया आज मेडिटेशन और ब्रीदिंग एक्सरसाइज की बात करती है, लेकिन गायन स्वयं पूर्ण योगाभ्यास है। इसमें शरीर, मन और बुद्धि एक लय में आते हैं। एआई के दौर पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि एआई आवाज की नकल तो कर सकता है, लेकिन गमक, मुरकी जैसे सूक्ष्म शास्त्रीय भाव या गुरु-शिष्य परंपरा में शिष्य के मन का भाव पढ़ना उसके बस की बात नहीं। मालिनी कहती हैं कि आज के दौर में लोगों को लोकसंगीत सुनाना एक चुनौती बन गई है।