पश्चिमी उप्र की अहम 96 विधानसभा और 19 लोकसभा सीटाें को पूरी तरह से संघ केरंग में रंगने का आरएसएस का एजेंडा पूरी तरह से साफ हो गया। आरएसएस के राष्ट्रोदय समागम में सर संघचालक मोहन भागवत ने कहा कि संघ अपने हिंदुत्व के मुद्दे पर भाजपा को चुनावी रण में उतारेगी। सर संघचालक ने अपने भाषण का मुख्य हिस्सा हिंदुत्व पर केंद्रित किया। हालांकि बात कुछ इस तरह से रखी गई कि सामाजिक समरसता का संदेश भी जोर शोर से गुंजायमान हो उठा।
क्रांतिधरा मेरठ कई मायनों में अहम मानी जाती है। यदि सत्ता के शिखर तक जाने की कवायद हो तो रास्ता मेरठ से ही गुजरता है। लोकसभा चुनाव 2014 में जहां भाजपा के तत्कालीन पीएम उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी ने मेरठ से ही चुनावी रैली का आगाज किया था। वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी मेरठ को ही चुना था। स्थानीय निकाय चुनाव में योगी आदित्यनाथ ने मेरठ में ही रैली की। हालांकि आरएसएस राजनीतिक संगठन नहीं पर भाजपा की पोषक है। ऐसे में रविवार को क्रांतिधरा पर आयोजित राष्ट्रोदय समागम से लोकसभा चुनाव 2019 का मार्ग तैयार करने की पूरी तैयारी की गई। आरएसएस के मेरठ प्रांत में 10580 गांव, 1553 बस्तियां और 400 उपबस्तियां शुमार हैं।
इसके अलावा यह समागम 14 जिलों का बुलाया गया था, लेकिन 18 जिलों को प्रभावित कर रहा था। इन जिलों में 96 विधानसभा की महत्वपूर्ण सीटें हैं, जिनमें अस्सी से ज्यादा पर भाजपा का कब्जा है। इस तरह 19 लोकसभा सीटें हैं और यहां 15 से ज्यादा भाजपा के हिस्से में हैं। आरएसएस इस समागम को यहां इसलिए भी करना चाहती थी, क्योंकि एक बार फिर चुनाव सिर पर है। लोकसभा 2019 की तैयारियां शुरू हो गई हैं और इन सीटों पर भाजपा की जीत का मार्ग प्रशस्त करने में आरएसएस महती भूमिका अदा करना चाहती है।
एजेंडा वही, बात नई
आरएसएस के मंच पर मोहन भागवत के अलावा महामंडलेश्वर जूना अखाड़ा अवधेशानंद गिरि महाराज और जैन मुनि विहर्ष सागर जी, प्रभात गुरुकुल आश्रम के कुलाधिपति स्वामी विवेकानंद को विराजमान किया गया। इसके अलावा मोहन भागवत ने साफ कहा कि समाज के हर वर्ग को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जोड़ने पर ही बात बनेगी। खास तौर पर सामाजिक समरसता की बात कही। बोेले कि हमारा खान पान, दर्शन, जीवन शैली अलग-अलग हो सकती है पर हम सब हिंदू हैं। उन्होंने हिंदू को परिभाषित भी किया। कहा कि जो दूसरों की पीड़ा समझे वही हिंदू है। जो निर्बल का सहारा बने वहीं हिन्दू है। जो भारत माता को माने वही हिंदू है। कहा कि कुछ इस तरह तन, मन, धन के साथ संघ से जुड़ो कि निडर बन जाओ। योग्य बन जाओ। कहा कि हमारे देश में कुछ लोग यह जानते तो हैं कि वे हिंदू हैं पर कहते नहीं है। यदि वे भी कहें तो पूरे विश्व में हमारी शक्ति और बढ़ जाए। हालांकि यह अब धीरे-धीरे हो रहा है।
उदाहरण, कहानियों से भरा जोश
मोहन भागवत ने विभिन्न उदाहरण, पंचतंत्र की लघु कहानियों के जरिए स्वयंसेवकों में जोश भरा। कहा जो शक्तिशाली है, उसे प्रदर्शन करने की जरूरत नहीं। वह स्वत: ही दिख जाता है। उन्होंने याद दिलाया कि पवन पुत्र हनुमान को उनकी शक्ति याद दिलानी पड़ी थी। उसके याद आते ही वे महाबली हो गए थे। एक छलांग में समंदर पार कर गए और लंका को जला डाला। उसी तरह से सभी युवाओं को अपनी शक्ति को याद करना होगा। शेर की कहानी सुनाकर बताया कि शक्ति को बताने की जरूरत नहीं होती।