मेरठ। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद शास्त्रीनगर में आवास विकास परिषद की कार्रवाई अब केवल सेक्टरों तक सीमित नहीं रहेगी। परिषद की योजना संख्या-3 और 7 के अंतर्गत आने वाले ए से एल ब्लॉक तक के सैकड़ों मकान और दुकानें भी अब जद में हैं। कारण है कि आवास विकास परिषद की योजना नंबर तीन और सात के 1468 भूखंडों की सर्वे रिपोर्ट आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने 2024 में ही न्यायालय को सौंप दी थी।
आवास विकास परिषद की शास्त्रीनगर में योजना नंबर तीन और सात हैं। अभी तक केवल शास्त्रीनगर की योजना सात के भूखंड, जिनमें सेंट्रल मार्केट का इलाका शामिल है। उनपर कार्रवाई चल रही है। जबकि 9 नवंबर 2024 को आवास विकास परिषद के अधिकारियों द्वारा शास्त्रीनगर की दोनों योजनाओं के 1468 भूखंडों की रिपोर्ट न्यायालय में सौंपी गई। आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना का आरोप है कि आवास विकास परिषद के अधिकारी कार्रवाई में दोहरा मापदंड अपना रहे हैं। ए से एल ब्लॉक क्षेत्र में ऐसे लोग रहते हैं जिनकी पहुंच प्रदेश की सत्ता के गलियारों तक है। यही कारण है कि अधिकारी कोर्ट की रिपोर्ट के बावजूद वहां कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं और केवल सेक्टरों में रहने वाली सामान्य जनता को निशाना बना रहे हैं।
आवास विकास के अधिकारियों की मुख्यमंत्री से शिकायत
अधिकारियों की कार्यप्रणाली से नाराज होकर लोकेश खुराना ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की है। इस शिकायत में अधिकारियों के काले चिट्ठे का जिक्र करते हुए बताया गया है कि परिषद न्यायालय के आदेशों का पालन करने के बजाय अपनी मर्जी से चुनिंदा लोगों को परेशान कर रही है। शिकायत में मांग की गई है कि कार्रवाई उसी सर्वे रिपोर्ट के आधार पर होनी चाहिए जो सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई है न कि किसी के दबाव में।