मेरठ। नगर निगम और जल निगम की लापरवाही तथा हीलाहवाली के चलते शहरवासियों को 34 दिन बाद भी गंगाजल की आपूर्ति नहीं की जा सकी है। जिलाधिकारी का अल्टीमेटम मंगलवार को खत्म हो चुका है। बुधवार को प्लांट के इंटेक चैंबर की सफाई शुरू की गई। इसके लिए चैंबर में भरे पानी को सेटलिंग बेसिन में लेना पड़ा। अधिकारी प्लांट संचालन का निर्धारित समय नहीं दे पा रहे हैं। उनका कहना है कि काम पूरा होते ही आपूर्ति चालू कर दी जाएगी।
गंगनहर स्थित भोला की झाल पर बने 100 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की सफाई गंगनहर की वार्षिक सफाई के दौरान ही की जाती है। हर साल ऐसा होता है परंतु इस बार नगर निगम और जल निगम के बीच प्लांट के संचालन और रखरखाव के भुगतान को लेकर खींचतान हुई। इसके चलते उन्हें 34 दिन बाद भी गंगाजल की आपूर्ति नहीं हो सकी है जबकि प्लांट पर दो दिन पहले गंगाजल पहुंच चुका है। आधी अधूरी सफाई के साथ प्लांट चलाने की तैयारी कर रहे अधिकारियों की पोल अमर उजाला ने बुधवार के अंक में खोली। इसमें बताया कि इंटेक चैंबर की सफाई किए बगैर उसमें पानी लिया जा रहा है। इसके साथ बैकफुट पर आए अधिकारियों ने बुधवार को ही इंटेक चैंबर की सफाई शुरू कराई। चैंबर के पानी को प्लांट के सेटलिंग बेसिन में लिया। चैंबर खाली होने के बाद शाम तक उसकी सफाई की जाती रही। जल निगम के परियोजना प्रबंधक रमेश चंद्रा ने बताया कि चैंबर की सफाई चल रही है। इसके अतिरिक्त प्लांट की मशीनों की भी मरम्मत जारी है। काम पूरा हो जाने पर आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी। वहीं, नगर निगम के सहायक अभियंता जलकल एवं प्लांट प्रभारी सुनील कुमार का कहना है कि प्लांट की सफाई पूरी होने के बाद निरीक्षण किया जाएगा। इसमें सबकुछ ठीक मिलने पर ही प्लांट चालू किया जाएगा।