अधिवक्ता ओंकार सिंह तोमर की खुदकुशी करने की सूचना पर इंस्पेक्टर गंगानगर बिजेंद्र सिंह राणा 11 बजे ईशापुरम पहुंचे थे। ओमकार तोमर के पास मिले सुसाइड नोट में भाजपा विधायक दिनेश खटीक का नाम देखते ही पुलिस में खलबली मच गई।
पुलिस ने सबसे पहले सुसाइड नोट को सील कर दिया। यह जानकारी पुलिस अधिकारियों को मिली तो वह भी मामले को रफा-दफा करने में लग गए। अधिवक्ता की मौत के मामले में विधायक का नाम एफआइआर से कैसे बचाए। इसको लेकर खूब प्रयास भी हुए।
पुलिस मामले को खींचती रही और मेरठ कचहरी से अधिवक्ताओं का आना गंगा नगर थाने पर शुरू हो गया। बस फिर क्या था अधिवक्ताओं और पीड़ित परिवार ने एक सुर में कह दिया, जब तक विधायक समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं होगा और एफआईआर की कॉपी उनको नहीं मिलेगी। तब तक शव नहीं उठेगा और अधिवक्ता भी मवाना रोड पर जाम लगाकर बैठे रहेंगे।
पुलिस ने विधायक को बचाने के लिए तमाम प्रयास किए। यहां तक कि इंटरनेट की कनेक्टिविटी के तार तक भी काट दिया। पुलिस ने अधिवक्ताओं को बताया कि कनेक्टिविटी नहीं है। एफआईआर की कॉपी नहीं दी जा सकती। आठ घंटे गहमागहमी के बाद पुलिस ने विधायक सहित 14 लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया।
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