सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वेटनरी कॉलेज का भविष्य अंधकार में चला गया है। करोड़ों रुपये की लागत से बने कॉलेज का कोई अस्तित्व नहीं रह गया है। अब कॉलेज में होने वाले दाखिले फैजाबाद विश्वविद्यालय ट्रांसफर किए जा रहे हैं। कुलपति और अधिकारियों की लापरवाही के कारण सात साल में 122 पदों में से मात्र 17 पर ही नियुक्ति हो पाई है।
जब वेटनरी कॉलेज का निर्माण शुरू हुआ तो लगा कि यहां के क्षेत्र को एक बहुत बड़ी सौगात मिल रही है। निर्माण में 34 करोड़ रुपये खर्च हो गए। बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई तो चलाने की बारी आई। जैसे तैसे करके तत्कालीन कुलपति ने वर्ष 2008 में नॉन टीचिंग और टिचिंग के 122 पद स्वीकृत किए। पद की स्वीकृति के बाद वर्ष 2011 में बिना अनुमति के कॉलेज को शुरू कर दिया गया। काफी मशक्कत के बाद वेटनरी काउंसिल ऑफ इंडिया ने पिछले साल सशर्त मान्यता दी। कुलपति को निर्देश दिए कि वे 31 मार्च 2015 तक सभी पदों पर नियुक्ति कर लें। लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। अभी तक कॉलेज के किसी भी बैच को डिग्री नहीं मिली है।
सात साल में 17 भर्ती
वर्ष 2008 में शासन ने वेटनरी कॉलेज में नियुक्ति के लिए 61-61 पद टीचिंग और नॉन टिचिंग के स्वीकृत किए थे। इनमें से 17 पद ही अभी तक भरे गए हैं। इनमें से कोई भी पद प्रोफेसर का नहीं है। बिना प्रोफेसर के कॉलेज में कैसे पढ़ाई होगी। विवि अभी तक वीसीआई के मानकों पर खरा नहीं उतर सका है।