शुक्रवार के अंक में अमर उजाला में प्रकाशित खबर
नमामि गंगे के नाम पर हो रहे खिलवाड़ पर
(अमर उजाला इंपैक्ट)
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। नमामि गंगे परियोजना के नाम पर गंगा नदी को प्रदूषित किए जाने के गंभीर आरोपों पर आखिरकार प्रशासन हरकत में आ ही गया। श्री क्षत्रिय राजा अनंगपाल तोमर गो रक्षक सेवा समिति की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गए शिकायत पत्र पर लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। इस मुद्दे को अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में नमामि गंगे के नाम पर गंगा से हो रहा खिलवाड़ शीर्षक से समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने संज्ञान लिया और शनिवार को मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की।
गांव जलालपुर जोरा व मिर्जापुर गांव के समीप गंगा नदी के किनारे फैल रहे प्रदूषण के खिलाफ समिति के अध्यक्ष राजवीर सिंह ने तहसील समाधान दिवस में कमिश्नर से शिकायत की थी। इसके बाद शनिवार को नायब तहसीलदार व लेखपाल के नेतृत्व में राजस्व विभाग, पुलिस, वन विभाग और गोसेवा संगठन की संयुक्त टीम पहुंची। टीम ने गंगा तट पर सरकारी भूमि पर अवैध रूप से खेती कर रहे लोगों को सख्त चेतावनी दी और भविष्य में दोबारा ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई की बात कही।
कार्रवाई के दौरान गंगा किनारे बनाए गए अस्थायी शौचालयों को ध्वस्त कराया गया। साथ ही मुर्गे की बीट से फैली गंदगी के अंबार को साफ कराया गया, जो लंबे समय से सीधे गंगा में प्रदूषण फैला रहे थे। मौके पर मौजूद गोसेवा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवीर सिंह ने कहा कि सरकार गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए नमामि गंगे जैसा सबसे बड़ा अभियान चला रही है लेकिन कुछ लोग लगातार गंगा की पवित्रता से खिलवाड़ कर रहे हैं। कई बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होना चिंताजनक था।
उन्होंने बताया कि गंगा के किनारे मौजूद सभी अवैध प्रदूषण स्रोतों को तत्काल हटाया गया है। मुर्गे की बीट और शौचालयों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे नदी में मिल रहा था। जिसे टीम द्वारा तुरंत बंद कराया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने दोबारा प्रदूषण फैलाने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। प्रशासन ने भविष्य में नियमित निरीक्षण कर गंगा की स्वच्छता बनाए रखने का आश्वासन दिया।