रतिराम खूबचंद फर्म के खिलाफ अवैध केरोसिन स्टॉक का मामला परतापुर थाने में दर्ज है। भूमिगत चारों टैंकों में कितना तेल है? बिना खोदाई हुए इसकी जानकारी नहीं हो सकती। जांच अधिकारी की तरफ से टैंकों की खोदाई कराने के लिए कोई पहल नहीं की गई। बड़ सवाल यही है कि बिना टैंक की खोदाई के जांच कैसे चल रही होगी? सात सितंबर से रतिराम खूबचंद फर्म पर शिफ्टों में चार मजिस्ट्रेट और पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं।
डिपो सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में है। इस पूरी व्यवस्था में काफी धन खर्च हो चुका है। सरकारी तंत्र का कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर श्योराज सिंह का कहना है कि वह आईओसीएल को टैंक की खोदाई के लिए पत्र लिख चुका हूं।
वहां से कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। सवाल यह उठता है कि जांच में सहयोग न करने पर उन्होंने कानूनी कदम क्यों नहीं उठाया? टैंक की खोदाई के लिए पेट्रोलियम एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन आगरा का भी सहयोग लिया जा सकता था, लेकिन आज तक जांच अधिकारी ने पत्र नहीं लिखा।
जांच अधिकारी ने कानूनी कदम क्यों नहीं उठाया, डिपो में कैसे खड़ा है अवैध टैंकर
सबसे बड़ा सवाल ये है कि तेल कंपनियों की गाइड लाइन के अनुसार पेट्रोल-डीजल की सप्लाई करने वाले टैंकरों के रंग अलग होते हैं। केरोसिन की सप्लाई करने वाले टैंकर का रंग नीला होता है। रतिराम खूबचंद फर्म के भीतर जो टैंकर खड़ा है, उसका रंग सफेद है।
टैंकर में आईओसीएल का लोगो भी लगा है। इस संबंध में एडीएम सिटी ने जब आईओसीएल से जवाब मांगा तो बताया कि कोई ऐसा निश्चित रंग नहीं होता है। जब गाइड लाइन का हवाला दिया गया तो आईओसीएल के अधिकारी चुप्पी साध गए। अभी तक इस पर जवाब नहीं दिया।
एसआईटी आज सौंप सकती है जांच रिपोर्ट
परतापुर स्थित पारस और गणपति केमिकल फैक्टरी में मिलावटी तेल के मामले में पुलिस प्रशासन की भूमिका की जांच करने आई शासन की एसआईटी शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को रिपोर्ट सौंप सकती है। इसको लेकर पुलिस-प्रशासन के आला अधिकारी लखनऊ में फोन कर जानकारी ले रहे हैं। एसआईटी की जांच रिपोर्ट के बाद कुछ अफसरों पर गाज गिर सकती है।