मेरठ। शहर से कनेक्टिविटी बढ़ेगी, अगले चार-पांच साल में मेरठ बदला हुआ नजर आएगा। मेट्रो का काम शुरू होने वाला है, रैपिड रेल और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे बनने पर शहर से कनेक्टिविटी काफी बढ़ जाएगी। बिल्डरों ने ही नहीं, विकास प्राधिकरणों ने भी अपने वादे पूरे नहीं किए, इस मिलीभगत में अथॉरिटी भी दोषी है, इसलिए रेरा की जरूरत पड़ी। यह कहना है प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव आवास एवं नगर विकास मुकुल सिंघल का।
वे रविवार को वेस्टर्न यूपी चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के तत्वावधान में बांबे बाजार स्थित गूजरमल मोदी हॉल में आयोजित ‘इंपेक्ट एंड इंप्लीकेशन ऑफ जीएसटी एंड रेरा ऑन द रीयल एस्टेट’ विषय पर हुए सेमिनार में मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा कि अब नक्शे ऑनलाइन दो दिन के भीतर पास किए जाएंगे और ऑनलाइन शिकायतों पर तुरंत एक्शन किया जाएगा। यूपी का रेरा, केंद्र सरकार के रेरा से बेहतर है। रीयल एस्टेट अनियंत्रित सेक्टर था, बिल्डर मनमानी भी करते थे। रेरा जैसा कानून मनमानी करने वालों पर शिकंजा कसता है। जब जूता काटने लगता है तो बदलाव की जरूरत पड़ती है। कोई भी सरकार ये नहीं कर सकती है बड़ा वर्ग परेशान रहे और छोटे वर्ग को सुविधाएं दे दे। आम जन की सुविधाओं का ध्यान रखना पड़ता है। उन्होंने रीयल एस्टेट कारोबारियों के सवालों के जवाब भी दिए। इससे पहले कार्यक्रम का उद्घाटन सासंद एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. संजीव बालियान, एमडीए वीसी साहब सिंह चैंबर के अध्यक्ष अरविंद नाथ सेठ और कार्यक्रम चेयरमैन अजय गुप्ता ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर किया। जीएसटी और रेरा पर विस्तार से चर्चा हुई। सवाल-जवाब हुए। कारोबारियों ने अपनी समस्याएं बताईं, अधिकारियों ने जवाब दिए।
विकास प्राधिकरण को सरलीकरण करना चाहिए: संजीव बालियान
पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. संजीव बालियान
- फोटो : अमर उजाला
पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. संजीव बालियान ने कहा कि प्रदेश सरकार के आने केबाद हर विभाग में सरलीकरण हुआ है। अपराध हो या भ्रष्टाचार, सब में कमी आई है। सिंचाई, पीडब्ल्यूडी आदि विभागों में जिस तरह से सरलीकरण हुआ है, उस तरह से अथॉरिटी में उतना सरलीकरण नहीं हुआ है, जो कि होना चाहिए।
पार्कों में भी काट देते थे प्लाट
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि रेरा से पहले एक तरफा व्यवस्था हो रही थी, बिल्डर और अथॉरिटी आम लोगों पर भारी पड़ रहे थे। सोसायटी में पार्क बनाने का दावा करते थे और उसमें भी प्लाट काट देते थे। बिल्डर और अथॉरिटी दोनों की ऐसी शिकायतें आ रही थीं। अब कानून में ढील दिए जाने की मांगें की जा रही हैं।
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