उन्होंने कहा कि हमें सबसे पहले धर्म, जाति, प्रदेश, भाषा से ऊपर उठकर भारतीय होना होगा। मैं ये मानता हूं कि देश सबसे बड़ा होता है। जब हम अपने आप से ऊपर, अपने धर्म से ऊपर, अपनी जाति से ऊपर उठ जाते हैं, तभी से हमारे अंदर सकारात्मक दृष्टिकोण आना शुरू हो जाता है। भारतीय न्यायिक प्रक्रिया में सर्वोच्च न्यायालय सबसे बड़ा है। अगर वह कोई फैसला दे रहा है तो सबको स्वागत करना चाहिए। यह फैसला किसी के खिलाफ नहीं है।
सबसे अच्छा यह है कि इसमें कहीं भी बांटने वाली बात नहीं है। यही भारतीयता के मूल में है। कुल मिलाकर यह फैसला भारतीयता के हक में है। देश की एकता और अखंडता को बढ़ाने में यह सहायक सिद्ध होगा।
सबसे बड़ी बात है इस फैसले का दृष्टिकोण, जो पूरी तरह से दोष रहित है। क्योंकि सुबह तक सभी यह कह रहे थे कि फैसला जो भी होगा, हम उसका स्वागत करेंगे। ये अपने आप में बड़ी बात है। सामाजिक समरसता के लिए यही सकारात्मक दृष्टिकोण होता है। अच्छा फैसला है इसके बहुत सुखद परिणाम आएंगे।
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