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महिला सशक्तिकरण के दौर में शहर की बेटियां भी किसी से कम नहीं, बसों में कर रही कंडक्टरी

Thu, 22 Dec 2016 06:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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महिला सशक्तिकरण के दौर में मेरठ की बेटियां भी किसी से पीछे नहीं है। पढ़ाई-लिखाई और खेलों में नाम कमाने के साथ ही बेटियों ने अब पुरुष प्रधान नौकरियों में भी हाथ आजमाना शुरू कर दिया है। मेरठी बेटियों ने न केवल रोडवेज परिचालक की परीक्षा पास की, बल्कि ईटीएम थामकर टिकट भी काट रही हैं। अमर उजाला ने भैसाली डिपो में कार्यरत महिला परिचालकों से बात की तो उन्होंने बेबाकी से सफलता की कहानी शेयर की।
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परिवार के लिए जरूरी थी नौकरी
मेरठ से दिल्ली के बीच चलने वाली भैसाली डिपो की एसी बस संख्या यूपी-12 एटी 0038 पर तैनात माधवपुरम निवासी परिचालक शीतल अग्रवाल ईटीएम से यात्रियों के टिकट काट रही थी। शीतल ने बताया कि उनके पिता और दो भाई प्राइवेट जॉब करते हैं। घर की आर्थिक जरूरत को पूरा करने के लिए नौकरी जरूरी थी। एमए करने के बाद वर्ष 2015 में परिचालक भर्ती में नंबर आ गया। पांच दिसंबर से रूट पर चल रही हूं। यात्रियों का पूरा सहयोग मिल रहा है।  

महिलाएं किसी से नहीं कम
मेरठ-दिल्ली रूट की एसी बस में तैनात माधवपुरम निवासी रीता ने बताया कि उनके पिता बीमार रहते हैं। मां गृहिणी है। मेहनत से पढ़ाई कर परिचालक की नौकरी हासिल की। ऑफिस की बजाय अधिकारियों ने रूट पर चलने को कहा तो मैं भी इसके लिए तैयार हो गई। रूट पर अभी तक कोई परेशानी नहीं हुई हैं। आज की महिलाएं किसी से कम नहीं है।
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निभा रही जिम्मेदारी
मेरठ से आगरा रूट की एसी बस पर तैनात मलियाना निवासी रमा की कहानी संघर्ष से भरी है। पिता मजदूरी करते हैं और मां गृहिणी है। परिवार की आर्थिक हालत सुधारने के लिए उन्होंने एमए बीएड किया और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की। परिचालक में नंबर आया तो बेहद खुशी मिली। टीईटी का एग्जाम दिया है। शिक्षक बनने का मौका मिला तो ही वे इस नौकरी को छोड़ने का फैसला करेंगी।

नौकरी पाकर हूं खुश
मेरठ-आगरा रूट की एसी बस पर तैनात मलियाना निवासी ज्योति ने बताया कि चार भाई-बहनों को पिता ने मेहनत कर पढ़ाया। उन्होंने अंग्रेजी विषय से एमए किया है। वे घर में सबसे बड़ी हैं, बाकी भाई बहन पढ़ रहे हैं। परिचालक की नौकरी मिलने से वह और परिवार खुश है।

12 परिचालक मिली है रीजन को
मेरठ रीजन को 120 नए परिचालक मिले हैं। इनमें से 12 महिला परिचालक हैं। मेरठ डिपो को 7, भैसाली डिपो को 4 और सोहराबगेट डिपो को एक महिला परिचालक दी गई है। सभी ने ट्रेनिंग के बाद रूट पर जाना शुरू कर दिया है। -मनोज कुमार पुंडीर, आरएम 
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