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आवास विकास की 50 करोड़ से ज्यादा की जमीन पर कब्जा, बन गया विशाल मेगा मार्ट

Sat, 27 May 2017 01:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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आवास विकास की पचास करोड़ रुपये से भी ज्यादा की ऐसी जमीन पर कब्जे हैं जिसका अधिग्रहण किया जा चुका है। इसमें से काफी जमीन का तो मुआवजा भी दिया जा चुका है। विशाल मेगा मार्ट का मामला सामने आने के बाद अन्य खसरा नंबर भी चेक किए जा रहे हैं। जांच में ऐसे कई खसरे सामने आए हैं। उधर आवास विकास परिषद अधिकारी कह रहे हैं कि सिजरे पर सुपर इंपोज कराकर ऐसे सभी निर्माणों को चिह्नित करने की बात कही जा रही है।
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मेरठ में लगातार जमीनों पर अवैध कब्जे के मामले सामने आ रहे हैं। एमडीए की योजनाओं में जहां आए दिन इसे लेकर हंगामा है तो वहीं आवास विकास परिषद का नया खेल सामने आ रहा है। विशाल मेगा मार्ट को लेकर की गई जांच में यह सामने आया कि यह आवास विकास परिषद की जमीन पर बना है। अहम बात यह है कि अर्से से यहां काम चलता रहा। निर्माण हुआ और सालों से यह चल भी रहा है पर किसी का ध्यान नहीं गया। एमडीए ने इस पर सील लगाई और प्रशासन से एनओसी मांगी तब यह खुलासा हुआ कि यह आवास विकास की अधिग्रहीत जमीन पर निर्मित है।

दर्जनों खसरा नंबरों पर हैं इसी तरह के कब्जे
केवल खसरा नंबर 5863 ही नहीं, बल्कि नई सड़क, गढ़ रोड, जयदेवी नगर के आसपास ऐसे दर्जनों खसरा नंबर हैं जिन पर लोगों के कब्जे हैं। आवास बने हैं या कमर्शियल गतिविधियां संचालित हैं। खसरा संख्या 5853 के साथ-साथ इसी श्रेणी से जुड़े कई खसरा नंबर भू अभिलेखों में आवास विकास परिषद के नाम दर्ज हैं। यूपीजेड ए में दर्ज श्रेणी 6-2 की ऐसी कई जमीन है जो अकृषिक भूमि स्थल, सड़क, रेलवे, भवन आदि के लिए दर्ज हैं। बावजूद इसके इन जमीनों पर कब्जा आवास विकास का नहीं है। लगभग बीस हजार वर्म मीटर से ज्यादा जमीन ऐसी ही हैं जिस पर लोगों के मकान दुकान बने हैं। 
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मुआवजा भी दे चुका है आवास विकास
हैरत की बात यह है कि जमीन का मुआवजा पहले ही दिया ही जा चुका है। कुछ प्रकरण अदालत में गए तो बढ़ा मुआवजा बाद में दिया गया। गजब यह है कि जिस जमीन पर विशाल मेगा मार्ट खड़ा है उसका बढ़ा हुआ मुआवजा इसी साल जनवरी माह में मूल काश्तकार को दिया गया है। आवास विकास ने तब भी यह नहीं देखा कि जिस जमीन का मुआवजा दिया जा रहा है वहा वास्तव में क्या स्थिति है।

अब सिजरे पर करेंगे सुपर इंपोज
आवास विकास अधिकारी अब सिजरे पर ऐसे खसरों को सुपर इंपोज करने की बात कह रहे हैं। अधिशासी अभियंता राजीव गुप्ता के मुताबिक यह अधिग्रहण बीस से तीस साल पुराने हैं। जहां अधिग्रहण हुआ वहां पहले भी कुछ स्थानों पर आबादी थी पर उनका भी अवार्ड घोषित हो गया। हालांकि कुछ जगह का मुआवजा नहीं दिया गया है पर कुछ जगह मुआवजा दे दिया गया। अब ऐसे नंबराें पर काम होगा और आला अधिकारियों से मंजूरी लेकर कार्रवाई होगी। जहां निर्माण हैं उन्हें नीलाम करने तक की कार्रवाई आवास विकास करेगा।

पर बिना पावर क्या खाक करेंगे एक्शन
भले ही आवास विकास अधिकारी एक्शन की बात कह रहे हों पर एक्ट में आवास विकास को अनाधिकृत निर्माण को सील करने की पावर ही नहीं है। वीसी एमडीए पावर दे नहीं रहे हैं तो ऐसे में आवास विकास अधिकारी क्या खाक एक्शन लेेंगे। हालांकि अधिकारी कह रहे हैं इस बाबत आवास विकास परिषद सचिव लखनऊ को पत्र लिखकर कहा है कि पावर दिलवाई जाएं।

आवास विकास की जमीन पर कहां कब्जे हैं, इसकी पूरी जांच कराई जाएगी। पावर के लिए प्राधिकरण अधिकारियों को पत्र लिखा। यदि पावर नहीं मिली तो शासन में संपर्क कर अपनी बात रखेंगे। पावर तो आवास विकास को डेलीगेट करनी होगी, नहीं तो कार्रवाई करना मुश्किल है। - महेंद्र प्रसाद, संयुक्त आवास आयुक्त
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