आवास विकास की संपत्तियों की नीलामी में गड़बड़झाला सामने आया है। शास्त्रीनगर में एक दुकान 72 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर्ज से बेची तो अन्य दुकानें 46 हजार की दर पर बेच दीं। यह खेल सामने आने पर संयुक्त आवास आयुक्त ने नीलामी रद कर दी। शासन को भी रिपोर्ट भेजने की तैयारी है।
यह है प्रकरण
आवास विकास परिषद अपनी संपत्तियों को नीलाम कर रहा है। माधवपुरम में आवासीय भूखंडों की नीलामी हुई। इसके साथ ही योजना नंबर सात शास्त्रीनगर में दुकानों की नीलामी हुई थी। माधवपुरम में 172 वर्ग मीटर के आवासों को नीलाम किया गया। इसमें सेक्टर दो में प्लाट संख्या 258 को 20102 रुपये वर्ग मीटर की दर से नीलाम किया गया। अन्य दो प्लाटाें को भी नीलाम किया गया। इसके अलावा शास्त्रीनगर सेक्टर दो में व्यवसायिक भूखंडों की नीलामी की गई। दुकानों के लिए 40 से लेकर 60 मीटर तक के भूखंडों को नीलाम किया गया।
रेटों में किया खेल
इन संपत्तियों की नीलामी में खेल कर दिया गया। माधवपुरम में जहां एक प्लाट 20102 रुपये की दर से नीलाम किया गया तो उसके साथ के प्लाट लगभग 17 हजार रुपये की दर से नीलाम कर दिए गए। बड़ा खेल तो व्यवसायिक भूखंडों की नीलामी में शास्त्रीनगर में हुआ। जहां एक दुकान 72 हजार रुपये वर्ग मीटर की दर से नीलाम की गई तो उसके बराबर की दुकानों के प्लाट मात्र 46 हजार रुपये वर्ग मीटर से नीलाम कर दिए गए। आरोप है कि यह सारा खेल सेटिंग से हुआ। नीलामी में एक ग्रुप बना और उसने अपने ही लोगों से बोली लगवाई। आवास विकास परिषद अधिकारियों ने पूरी प्लानिंग की।
स्वीकृति के लिए गई फाइल में पकड़ा खेल
इन संपत्तियों की नीलामी के लिए पत्रावली संयुक्त आवास आयुक्त महेंद्र प्रसाद के पास गई तो सारा खेल पकड़ा गया। उन्हाेंने रेटों को लेकर सवाल खड़े कर दिए। कहा कि एक संपत्ति इतनी महंगी और बराबर की दूसरी इतनी सस्ती कैसे। ऐसे में शास्त्रीनगर के पांच प्लाटों की नीलामी प्रक्रिया को उन्होंने मंजूरी नहीं दी और रद कर दी। माधवपुरम में भी यही किया। इतना ही नहीं, इस सारे प्रकरण पर संपत्ति अधिकारी से जवाब मांगा गया है। साथ ही शासन को भी रिपोर्ट भेजने की तैयारी है। सारे प्रकरण की जांच की जा रही है कि आखिर रेट का इतना अंतर क्यों आया?
पहले भी हुआ है खेल
आवास विकास में यह खेल लगातार चल रहा है। हापुड़ रोड पर एक बडे़ भूभाग पर भूखंड काट दिए गए। हैरत की बात यह रही कि इस जमीन का अधिग्रहण कभी हुआ ही नहीं और यह जमीन किसी की निजी संपत्ति है। भू स्वामी ने आला अधिकारियों से इसकी शिकायत कर दी जिसकी जांच की जा रही है। मामला संयुक्त आवास आयुक्त स्तर पर है और जांच चल रही है। इसके अलावा फर्जी जाति प्रमाणपत्रों पर भी प्लाट यहां नीलाम किए गए हैं। ऐसे मामलों की जांच लंबे समय से चल रही है।