आस्था के समंदर में डुबकी लगाने के लिए ऐसा सैलाब उमड़ा है, कि कांवड़ मार्ग और हाईवे पर जहां तक भी नजर जाती है कांवड़िये ही नजर आते हैं। शिवभक्त हरिद्वार से जल लेकर अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं। आस्था के एक समुंदर में एक साथ तीन तीन पीढ़ियां भी कांवड़ ला रही हैं। किसी ने बेटे के लिए मन्नत मांगी तो कोई अपनी मां की बीमारी देखकर कांवड़ ला रहा है। छह साल के बच्चे से लेकर 75 साल की उम्र के शिवभक्त भी एक दिन में 40 से 50 किमी तक पैदल चल रहे हैं।
मेरठ से होकर गुजरे राजस्थान के अलवर निवासी टेकचंद की उम्र करीब 73 साल है। वह अपने बेटे राजीव और नौ साल के पौत्र शिवम के साथ हरिद्वार से कांवड़ लेकर अपने गंतव्य को लौट रहे हैं। टेकचंद ने बताया कि चार बेटियों के बाद मन्नत मांगी तो बेटा पैदा हुआ। अब पौत्र भी उन्हें बुढ़ापे का सहारा दिखाई दे रहा है।
गुरुग्राम के 73 वर्षीय अमरनाथ बाबा ने बताया कि उनकी 32वीं कांवड़ है। साल में एक बार पैदल चलकर शरीर भी स्वस्थ्य रहता है। दौराला के वलीदपुर निवासी कंवरपाल अपनी पत्नी गुड्डी छह साल के बेटे दीपू और आठ साल की बेटी रेनू के साथ हरिद्वार से कांवड़ लाए हैं। कंवरपाल का कहना है कि बेटे के लिए उन्होंने परिवार के साथ कांवड़ बोली थी। राजस्थान में ही उन्होंने परिवार के साथ जल चढ़ाना है। कंवरपाल के छह साल के बेटे के कंधे पर छोटे ही आकार की कांवड़ थी। बच्चे ने बताया कि भोले का नाम लेकर पैर में न कोई छाला पड़ा और ही चलने में दिक्कत।
दो साल के मासूम को कंधे पर लेकर कांवड़
दिल्ली के शाहदरा निवासी जीतू अपने भाई अजय के साथ कांवड़ लेने गये थे। वहीं परिवार की महिला निशा का सवा दो साल का बेटा वंश और एक साल की बेटी वंशिका भी कंधे पर थे। दोनों सगे भाइयों ने बताया कि परिवार के साथ ही वह कांवड़ लेने गये थे। बच्चों को कंधे पर ले जा रहे हैं। भोलेनाथ का नाम लेकर यात्रा पूरी हो जाएगी।
14 की उम्र, 42 किलो वजन, 21 लीटर जल
राजस्थान के अलवर के शिवभक्त भी हरिद्वार से कांवड़ लेकर अपने गंतत्व की और बढ़ रहे हैं। 14 साल के सुबोध ने बताया कि उसका वजन करीब 42 कि ग्रा है। उनकी मां कई साल पहले ज्यादा बीमार हुई थी। वह पीछे साल जब कलश में जल लेकर आया था। मां की बीमारी में भी फायदा मिला तो इस बार वह अपने से आधे वजन यानी 21 लीटर जल कलश में लेकर आ रहा है। अपने ही गांव के मंदिर में जल चढ़ायेंगे।