माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। जागृति विहार एक्सटेंशन स्थित वेदांत आश्रम में शुभम करोति फाउंडेशन की ओर से गीता जयंती महोत्सव के तहत चल रहे गीता ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन शनिवार को महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद सरस्वती ने आत्मसंयम योग पर प्रवचन किया। उन्होंने कहा कि योगी की दृष्टि ब्रह्म मय हो जाती है। वह सभी प्राणियों को समभाव से देखता है और सदा अपनी आत्मा में ही रमण करता है। योगी एकांतप्रिय, जितेंद्रिय और अपरिग्रही होता है।
उन्होंने साधकों को भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए प्रारंभिक निर्देशों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि योग साधना के लिए निश्चित, पवित्र एवं स्थिर आसन पर काया, गर्दन और सिर को सीधा रखकर ध्यान होना चाहिए। अष्टांग योग के यम, नियम, प्राणायाम आदि सच्ची साधना के माध्यम हैं। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ प्राकृतिक चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गोयल ने दीप प्रज्ज्वलन से किया। व्यास पूजन कमलेश चौधरी एवं चांदनी रावत ने किया।
कथा स्थल पर गायत्री ज्ञान मंदिर मेरठ की ओर से जीवनोपयोगी आध्यात्मिक साहित्य एवं व्यसन मुक्ति प्रदर्शनी भी लगाई गई। इस अवसर पर अरविंद शर्मा, बीडी पांडेय, ब्रह्मपाल सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।