गंगा घाट पर तैनात नाविक स्रोत संवाद
हस्तिनापुर। पांच नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा का मुख्य स्नान है। शनिवार को मेले का उद्घाटन होते ही गंगा किनारे पर तंबुओं के नजारे दिखने लगे। क्षेत्र के मखदूमपुर गंगा घाट पर पतित पावनी मोक्षदायनी का जो किनारा वर्ष भर से वीरान था। वहां आस्था का बसेरा नजर आने लगा।
कल-कल बहती गंगा नदी के किनारे श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ने लगा है। लोग रेतीले मैदान में अपने परिवार के साथ निवास करने लगे हैं। कार्तिक पूर्णिमा मेले की यह शुरुआत है अभी यहां पर अगले चार दिनों में आस्था की बयार चलेगी। यहां पर बैठने के लिए आसानी से स्थान नहीं मिलेगा। कार्तिक पूर्णिमा मेला वैसे तो हमारी प्राचीन संस्कृति का एक हिस्सा रहा है। इसे देव दिवाली भी कहा जाता है। कहा जाता है कि इस अवसर पर स्वर्ग लोक से पितरों का पृथ्वी लोक पर आगमन होता है और उनके स्वागत के लिए गंगा किनारे पर विशेष प्रबंध किए जाते हैं।
गंगा घाट पर तैनात नाविक स्रोत संवाद
गंगा घाट पर तैनात नाविक स्रोत संवाद