हादसा, हत्या और आत्महत्या में उलझी मौत की गुत्थी
मीनाक्षी मौत का मामला हादसा, हत्या और आत्महत्या के बीच उलझ रहा है। रोहाना चौकी प्रभारी एसआई मनोज कुमार शर्मा के मुताबिक प्राथमिक जांच में सामने आया कि गुरुवार की रात किशोरी अपनी झोपड़ी में सोई थी, जबकि उसका भाई सुमित झोपड़ी के बाहर सोया हुआ था। तड़के करीब तीन बजे हल्की बूंदाबांदी हुई तो भाई भी झोपड़ी में जाकर किशोरी के पास ही सो गया था। कुछ देर बार बारिश थमी तो वह फिर से झोपड़ी के बाहर आकर सो गया। इसके बाद मीनाक्षी ने झोपड़ी का दरवाजा रस्सी से बांधकर अंदर से बंद कर लिया था। सुबह करीब पांच बजे झोपड़ी से धुआं निकलता देख भट्ठे के अन्य मजदूरों ने शोर मचाते हुए दरवाजा तोड़ा तो मीनाक्षी का जला हुआ शव मिला। बड़ा सवाल यही है कि झोपड़ी में आग कैसे लगी? जलते समय किसी ने किशोरी की चीख-पुकार तक नहीं सुनी जबकि उसका भाई झोपड़ी के बाहर ही सोया हुआ था।
इस संबंध में इंस्पेक्टर अनिल कपरवान का कहना है कि प्रथम दृष्टया जांच में झोपड़ी में रोशनी के लिए जलाई गई किसी मोमबत्ती या लालटेन से आग लगने का अंदेशा है। संभवत: आग पहले सामान में लगी, जिससे निकले धुएं से बंद झोपड़ी में सोई किशोरी बेहोश हो गई और बेहोशी के आलम में ही उसकी मौत हो गई। पीएम रिपोर्ट आने पर किशोरी की मौत के कारणों का खुलासा हो पाएगा।
गमगीन माहौल में हुआ शव का अंतिम संस्कार
किशोरी मीनाक्षी का शव शुक्रवार की शाम पोस्टमार्टम के बाद पीड़ित परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। परिजन शव लेकर गांव बधाईकलां चले गए, जहां गमगीन माहौल में शव का अंतिम संस्कार किया गया।
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