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अब जेल में बजेंगे बंदियों की फरमाइश के गाने, स्टूडियो हुआ तैयार, पढ़िए- और क्या है खास

Sat, 08 Feb 2020 02:46 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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जेल रेडियो के शुभारंभ पर डीजी कारागार आनंद कुमार, आईजी रेंज प्रवीण कुमार, एसएसपी अजय साहनी, एसपी ट्रैफिक संजीव वाजपेयी और अन्य अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ जेल के अंदर बंदियों को सुकून और शांति के कुछ पल देगा ‘जेल रेडियो’। जी हां, इसमें बंदी अपनी फरमाइश के गाने भी सुन सकेंगे। रेडियो का संचालन करने वाले साथी बंदी (रेडियो जॉकी), फरमाइश करने वाले के नाम के साथ उसका गाना बजाएंगे। इसके लिए जेल में स्टूडियो भी तैयार किया गया है। कार्यक्रम का प्रसारण एक घंटे ही होगा। शुक्रवार को डीजी जेल आनंद कुमार ने इसका शुभारंभ किया।

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जेल में बंदियों के बीच स्वस्थ मनोरंजन और उनके जीवन में बदलाव लाने के लिए 14 साल पहले सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप रघुनंदन ने जेल रेडियो की परिकल्पना को मूर्तरूप दिया था। वर्तमान में मैनपुरी, एटा, बिजनौर, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, फिरोजाबाद, हरदोई, बागपत, मथुरा, आगरा, गोरखपुर, रामपुर सहित 24 जेलों में ‘जेल रेडियो’ का संचालन हो रहा है। चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में 25वें ‘जेल रेडियो’ की स्थापना होगी। यहां हर दिन सुबह बैरक के अंदर मौजूद बंदियों से फरमाइश जुटाई जाएगी। इसके बाद दोपहर तीन से चार बजे तक उनका प्रसारण होगा। ‘जेल रेडियो’ का आधार पब्लिक एड्रेस सिस्टम होगा। इस सिस्टम से बंदियों को दिशा-निर्देश भी दिए जाते हैं। अब इसे रेडियो को बदल दिया गया है। बेहतर परिणाम मिलने पर समय बढ़ाने का निर्णय भी लिया जा सकता है। इस दौरान आईजी रेंज प्रवीण कुमार व एसएसपी अजय साहनी मौजूद रहे। 

बंदी ही होंगे रेडियो जॉकी
जेल रेडियो में जिला कारागार के बंदी ही रेडियो जॉकी की भूमिका में नजर आएंगे। फिलहाल चार विचाराधीन बंदियों को जॉकी के रूप में चुना गया है। उन्हें ट्रेनिंग भी दी गई है। यही चार बंदी फरमाइश जुटाने का काम करेंगे। इस शुरुआत से जेल के भीतर का माहौल बदलने की संभावना बढ़ गई है।

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एक अभिनव प्रयोग है
जेल रेडियो एक अभिनव प्रयोग है। यह न सिर्फ बंदियों का मनोरंजन करेगा बल्कि उनको अपराध से विमुख रखने, मानसिक परिवर्तन लाने, निराशा व अवसाद से उबारने में सहायक होगा। उनके अंदर उच्च जीवन मूल्यों की स्थापना करने में इसकी अहम भूमिका होगी। - डॉ. बीडी पांडेय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक

सुधार गृह की होती है भूमिका
मनोरंजन से व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ और प्रसन्न रहता है। कारागार की भूमिका सुधार गृह की होती है। जहां बंदियों को पठन-पाठन, खेलकूद, मनोरंजन के अवसर प्राप्त हों और वह अपना पुनर्मूल्यांकन कर जीवन के आदर्श पथ पर पुन: स्थापित हो सकें। - प्रदीप रघुनंदन, सामाजिक कार्यकर्ता

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