अमर उजाला....आर्य समाज शास्त्रीनगर में आयोजित वार्षिकोत्सव में बोलते आचार्य हरिशंकर अग्निहोत्री
मेरठ। आर्य समाज शास्त्रीनगर के 46वें वार्षिकोत्सव का तृतीय सत्र शनिवार को यज्ञ के साथ शुरू हुआ। यज्ञ का विधिपूर्वक संचालन आचार्य रणधीर शास्त्री और डॉ. इंद्रदेव शास्त्री के ब्रह्मत्व में संपन्न हुआ। यजमान के रूप में ओमप्रकाश शास्त्री, हर्ष गोयल, नितिन गुप्ता एवं दिनेश कुमार सिंह रहे। कार्यक्रम में विद्वान आचार्य हरिशंकर अग्निहोत्री ने कहा कि संतुलित जीवन ही श्रेष्ठ है। इसका प्रयास करते रहना चाहिए।
कार्यक्रम में भजनोपदेशक पंडित सतीश सुमन एवं उनके सहयोगी सुभाष राही ने भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। तेरा प्यार ही है पिता जो चाहता हूं...जैसे भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके साथ ही स्वामी दयानंद सरस्वती के जीवन एवं विचारों पर आधारित गीतों ने श्रोताओं को प्रेरित किया।
युवा विद्वान आचार्य हरिशंकर अग्निहोत्री ने बताया कि स्वामी दयानंद के गुरु स्वामी विरजानंद ने उनके व्यक्तित्व की महानता को भलीभांति पहचान लिया था। समाज व राष्ट्र के उत्थान के लिए जीवन समर्पित करने की गुरु दक्षिणा मांगी, जो इतिहास में अद्वितीय है। उन्होंने पंडित गुरुदत्त विद्यार्थी, पंडित लेखराम एवं स्वामी श्रद्धानंंद का भी उल्लेख किया।
आचार्य हरिशंकर अग्निहोत्री ने कहा संतुलित जीवन की अवधारणा पर भी प्रकाश डाला गया। आचार्य ने कहा कि जीवन में व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, राष्ट्रीय एवं आध्यात्मिक संतुलन आवश्यक है। उन्होंने वेदांत दर्शन के सूत्रों के माध्यम से ईश्वर के अस्तित्व को सरल भाषा में स्पष्ट किया। संचालन रविंद्र सिंह एवं सुधा तोमर ने किया। अध्यक्षता अशोक सुधाकर और संगीता मक्कड़ ने की। इस अवसर पर सूरजपाल, मदनपाल सिंह, प्रभात कुमार, रामौतार आर्य आदि रहे।