मेरठ। मंडल और पीवीवीएनएल मुख्यालय होने के बावजूद शहर में बिजली का बुरा हाल है। तमाम दावों के बावजूद शहर की मांग के सापेक्ष चालीस फीसदी कम बिजली मिल रही है। सर्दी में मांग कम होने के बावजूद भी शहर में चार घंटे की रोस्टिंग कराई जा रही है। प्रस्तावित बिजलीघरों को जमीन नहीं मिलने से शासन से स्वीकृत धन लैप्स होने की कगार पर पहुंच गया है।
वर्तमान में शहर के 2 लाख 65 हजार 642 उपभोक्ताओं को 507 एमवीए क्षमता के 34 बिजलीघरों से बिजली आपूर्ति की जा रही है। उपभोक्ताओं के स्वीकृत लोड 8 लाख 4 हजार 323 किलोवाट के लिए 945 एमवीए क्षमता के बिजलीघरों की आवश्यकता है जो मौजूदा क्षमता से करीब दोगुनी है। सूबे में बिजली की कमी के चलते लखनऊ कंट्रोल से जहां गर्मियों में सात से आठ घंटे और सर्दियों में तीन से चार घंटे की रोस्टिंग कराई जाती है। वहीं जर्जर पावर सिस्टम को बचाने के लिए तीन से चार घंटे की लोकल कटौती आम बात है।
बिजली जाते ही गुल हो जाता है पानी
शहर की 90 फीसदी से ज्यादा आबादी नगर निगम के पानी पर निर्भर करती है। नगर निगम के पंपों पर जनरेटर की सुविधा बेहद कम है। बिजली जाते ही नगर निगम का पानी भी गुल हो जाता है। इसके चलते लोगों को बिजली कट के साथ पानी की कमी की मार भी सहनी पड़ती है।
इनवर्टर भी हो जाते हैं ठप
शहर की करीब एक चौथाई आबादी बिजली के वैकल्पिक साधन इनवर्टर पर निर्भर है, लेकिन गर्मियों में बिजली की बेतहाशा कटौती के चलते इनवर्टर भी ठप हो जाते हैं। व्यापारियों को बाजार में प्रकाश करने के लिए जनरेटर का सहारा लेना पड़ रहा हैं। यहां तक कि उद्योगों को भी स्वतंत्र फीडर से होने वाली 24 घंटे बिजली की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
क्या कहते हैं उपभोक्ता
मंडल मुख्यालय के साथ शहर में पीवीवीएनएल का भी मुख्यालय है। इसके बावजूद बिजली नहीं मिलना जनप्रतिनिधियों के लिए भी शर्म की बात है।
- विनोद कलंजरी
2. सर्वाधिक राजस्व देने वाले जनपदों मेें शुमार होने के बावजूद भी उपभोक्ताओं को बिजली नहीं मिल पा रही है। मांग के सापेक्ष बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए।
-चौधरी सतबीर सिंह
शहर के विकास के लिए बिजली की बहुत आवश्यकता है। बिजली नहीं मिलने से व्यापारियों के साथ उद्यमियों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
- कुलदीप कुमार त्यागी
शहर में बिजली का बुरा हाल है। सर्दियों में भी बिजली कटवाई जा रही है। गर्मियों में तो बिजली कटौती का बुरा हाल हो जाता है।
- सतेश्वर दत्त
शहरीकरण के लिए बिजली के बहुत आवश्यकता है। लेकिन बिजली की कमी के चलते उद्योगपति भी शहर से पलायन करते जा रहे हैं।
-विपुल चौधरी
- शहर में कब इमरजेंसी कटौती करा दी जाती है ये किसी को भी पता नहीं होता। लो वोल्टेज की भी सबसे बड़ी समस्या है। आए दिन फाल्ट के चलते बिजली कटी रहती है।
रजनीश कुमार
- शहर में बिजली कब चली जाए ये कहा नहीं जा सकता। मेट्रो सिटी की श्रेणी में आने के बाद भी शहर में बिजली का बुरा हाल है।
ओमवीर सिंह
- मांग के सापेक्ष शहर को बिजली आपूर्ति नहीं हो पाती है। बिजली कटौती के चलते पानी का जाना और सड़क जाम करना आम बात हो चली है।
- सुखवीर सिंह भड़ाना
क्या कहते हैं अधिकारी
शहर की जरूरत के हिसाब से बिजलीघरों का निर्माण कराया जा रहा है। रोहटा रोड और सूरजकुंड बिजलीघर के लिए जमीन मिल चुकी है। वेदव्यासपुरी और गंगानगर में बनने वाले 132 केवी ट्रांसमिशन के लिए एमडीए को पत्र भेज रखा है। 2016 तक शहरों में 22 घंटे बिजली आपूर्ति पर काम चल रहा है।
- विजय विश्वास पंत, एमडी पीवीवीएनएल