मेरठ। होटल अलकरीम को खड़ा करने में हुए ‘खेल’ की परत दर परत खुलती जा रही हैं। अब एक नया मामला सामने आया है। अलकरीम के मालिकान ने चार दुकानों को तोड़कर उनके ऊपर अवैध रूप से रेस्टोंरेंट खड़ा कर दिया। इससे पहले उन्होंने इन दुकानों में जहां किरायेदारों से साझेदारी दिखाई तो बाद में उनसे किरायेदारी पूर्ण रूप से अपने नाम करा ली।
होटल अलकरीम पहले चार दुकानों में ढाबा की तरह संचालित होता था। निगम किरायेदारी में दो दुकानें जनकराज के नाम पर, एक दुकान उनके पिता नानंक चंद के नाम पर और एक दुकान जनकराम की मां मुकुंदारानी के नाम पर थी। होटल मालिक नासिर इलाही और फिरोज इलाही ने 23 अक्तूबर 2000 को इन चारों दुकानों में अपनी साझेदारी दर्शाते हुए दुकान के किरायेदारों से साझेदारी का शपथ पत्र तैयार करा लिया। एक सप्ताह बाद 30 अक्तूबर को नासिर और फिरोज ने इन चारों दुकानों को एक तरफा अपने नाम किराये पर करा लिया और नगर निगम से भी इनके नाम से किराये की रसीद कटनी शुरू हो गई।
इसके बाद इन लोगों ने वर्ष 2009 में इन चारों दुकानों को तोड़कर यहां आलीशान रेस्टोरेंट खड़ा कर दिया। तब से लेकर अब तक कई बार शिकायत होने और शासन स्तर से भी जांच होने के बावजूद मामले में कुछ हुआ नहीं। इस बार फिर जब मामला शासन तक पहुंचा तो नगर निगम ने किरायेदारी समाप्त कर खाली करने का नोटिस जारी कर दिया। इस पर होटल मालिक कोर्ट चले गए और स्टे ले आए।
प्रकरण के निस्तारण की थी तैयारी
इस मामले में नगर निगम की समाधान राशि जमा कराकर प्रकरण के निस्तारण की साजिश थी। इसके लिए विगत बोर्ड बैठक में मुद्दा रखा भी जाना था, लेकिन जैसे ही शासन में शिकायत पहुंची, वैसे ही नगर निगम ने पलटी मारते हुए पूरी प्रक्रिया रोकते हुए कार्रवाई शुरू कर दी।
वर्जन
हम नगर निगम के किरायेदार हैं और किराया जमा करते रहे हैं। नगर निगम से समाधान शुल्क जमा करने का आवेदन भी किया हुआ है। लेकिन शिकायत पर हमारा आवेदन लंबित कर दिया गया। अब यह मामला कोर्ट में है, वहां से जैसा भी आदेश होगा, हमें मंजूर होगा।
- फिरोज इलाही, होटल मालिक
शिकायतकर्ता नूर इलाही आजाद हमारे सगे ताऊ हैं और लगातार झूठी शिकायतें करते आ रहे हैं। नूर इलाही लगातार ब्लैकमेल भी कर रहे हैं। कुछ साल पहले उन्होंने मुझसे अपनी शिकायतें वापस लेने की एवज में छह लाख रुपये भी लिए थे, लेकिन फिर से झूठी शिकायतें करते आ रहे हैं।
- नासिर इलाही, होटल मालिक