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लापरवाही की भेंट चढ़ी छात्रों की यूनिफार्म

Tue, 28 Oct 2014 05:32 AM IST
Meerut
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मेरठ। स्कूल प्रबंधक की लापरवाही के कारण प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को अब तक यूनिफार्म नहीं मिली है। शासन ने यूनिफार्म बांटने की अंतिम तिथि 15 अक्तूबर घोषित की थी, लेकिन अभी भी 75 प्रतिशत स्कूलों में ड्रेस नहीं बांटी गई है। 40 प्रतिशत स्कूलों में तो ड्रेस के सैंपल तक नहीं लिए गए हैं।
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कक्षा एक से आठवीं तक के बच्चों को सरकार की ओर से निशुल्क यूनिफार्म का वितरण किया जाता है। जिले में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की संख्या लगभग 13 सौ है। सेशन शुरू हुए भी छह माह बीत चुके हैं, अभी तक मात्र 25 प्रतिशत स्कूल ही बच्चों को ड्रेस दे पाए हैं। यह हाल तब है जब शासन ने 75 प्रतिशत धनराशि प्रथम किश्त के रूप में सभी जिलों को जारी कर दी है। मुख्य सचिव आलोक रंजन ने सभी जिलाधिकारी और मंडलायुक्त को पत्र लिखकर 15 सितंबर से 15 अक्तूबर तक हर हाल में ड्रेस बांटने के निर्देश दिए थे। इस कार्य की जिम्मेदारी विद्यालय प्रबंध समिति को सौंपी गई थी। स्कूलों की लापरवाही के कारण छात्रों को ड्रेस नहीं मिल सकी है।

टास्क फोर्स ने नहीं किया काम
बेसिक शिक्षा अधिकारी ने शासन के आदेश पर टास्क फोर्स का गठन किया था। इसमें करीब 12 सदस्यों को चुना गया था। इन सदस्यों को ड्रेस वितरण की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए थे। तय तिथि से एक सप्ताह बाद टास्क फोर्स को सभी विद्यालयों की रिपोर्ट बीएसए को देनी थी, लेकिन अभी तक रिपोर्ट नहीं दी गई है।
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क्वालिटी से हो रहा समझौता
जिले के 25 प्रतिशत स्कूलों में ड्रेस बांट तो दी गई है, लेकिन वहां पर क्वालिटी संतोषजनक नहीं है। खरखौदा, मवाना ब्लाक के दर्जनों विद्यालयों में ड्रेस की हालत अच्छी नहीं है। विद्यालय प्रबंध समितियों का कहना है 4 सौ रुपये में एक जोड़ी कपड़ा बनना मुश्किल है, ऐसे में दो जोड़ी ड्रेस कैसे वितरित की जा सकती हैं।

बहुत से विद्यालय ऐसे हैं जहां ड्रेस वितरण का कार्य पूर्ण नहीं हुआ है। विद्यालयों को अब सात दिन का समय दिया गया है, अगर इस समय में ड्रेस वितरण का कार्य पूर्ण नहीं किया गया तो जिलाधिकारी को रिपोर्ट प्रस्तुत कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिवेंद्र सिंह ऐरी, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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